पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग का मुख्य फोकस प्रत्याशियों द्वारा किए जा रहे चुनावी खर्च पर है। निर्वाचन व्यय की निगरानी के लिए प्रशासन ने एक सख्त खाका तैयार किया है, जिसके तहत सभी प्रत्याशियों के चुनावी खर्च के ब्योरे की तीन चरणों में सघन जांच की जाएगी।
तीन चरणों में होगी व्यय लेखा की जांच
निर्वाची पदाधिकारी सह पटना सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच की प्रक्रिया तीन निर्धारित तिथियों 20 जुलाई, 24 जुलाई और 27 जुलाई को संपन्न होगी। सभी प्रत्याशियों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक समाहरणालय के तृतीय तल स्थित कमरा संख्या-317 में अपना व्यय रजिस्टर और संबंधित अभिलेख अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के अंतर्गत प्रत्येक प्रत्याशी या उनके अधिकृत निर्वाचन अभिकर्ता के लिए निर्धारित तिथियों पर अपने खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत करना कानूनी अनिवार्यता है। इस दौरान अधिकृत अधिकारी और व्यय प्रेक्षक दस्तावेजों का बारीकी से मिलान करेंगे।
विसंगति मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
जांच के दौरान यदि किसी प्रत्याशी के खर्च के ब्योरे में कोई त्रुटि, कमी या खर्च छिपाने का मामला प्रकाश में आता है, तो रिटर्निंग अधिकारी द्वारा 24 घंटे के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा। अभ्यर्थी को 48 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा। यदि विसंगति सही पाई जाती है, तो उस राशि को प्रत्याशी के कुल चुनावी खर्च में जोड़ दिया जाएगा।
यदि कोई उम्मीदवार नोटिस मिलने के बाद भी व्यय लेखा प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, वाहन अनुमति सहित अन्य चुनावी अनुमतियां भी रद्द की जा सकती हैं। जिला व्यय अनुवीक्षण समिति (DEMC) सभी साक्ष्यों की समीक्षा कर 72 घंटे के भीतर अंतिम निर्णय लेगी।
प्रत्याशियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
चुनावी खर्च का पारदर्शी लेखा-जोखा सुनिश्चित करने के लिए आयोग 17 जुलाई को एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा। इसमें सभी प्रत्याशियों और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं को रजिस्टर संधारित करने, खर्च का विवरण तैयार करने और निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की बारीकियां सिखाई जाएंगी। निर्वाचन आयोग के निर्धारित प्रारूप के अनुसार ही ब्योरा तैयार करने के लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य है, जिसमें सभी की उपस्थिति अपेक्षित है।

