बेगूसराय। बरौनी रिफाइनरी के विस्तारीकरण परियोजना में कार्यरत साउथ ट्विन कंपनी के एक मजदूर की कार्यस्थल पर हुई मौत के बाद मामला गरमा गया है। मुआवजे के आश्वासन के बाद भी भुगतान न होने से आक्रोशित करीब 1,000 मजदूरों ने मंगलवार को जमकर प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात CISF द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी मजदूर हिंसक हो गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

​क्या है पूरा मामला?

​मृतक श्यामसुंदर पाठक, जो सबौरा के निवासी थे, विस्तारीकरण परियोजना में कार्यरत थे। 29 मई को काम के दौरान लोहे का पाइप गिरने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान 22 जून को उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद कंपनी प्रबंधन ने 48 घंटे के भीतर 17 लाख रुपये मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन श्राद्ध कर्म संपन्न होने के बाद भी एक रुपये का भुगतान नहीं किया गया।

​लाठीचार्ज के बाद भड़की हिंसा

​मुआवजा न मिलने से खफा परिजनों और साथी मजदूरों ने सोमवार से ही रिफाइनरी गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। मंगलवार को जब प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ी और काम ठप हो गया, तो स्थिति को संभालने के लिए CISF के जवानों को बुलाया गया। मजदूरों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिए CISF ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया। इसके विरोध में मजदूरों ने पथराव किया और CISF की एक बोलेरो गाड़ी को पलट दिया।

प्रशासनिक हस्तक्षेप और मजदूरों की मांग

घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीओ, डीएसपी और आसपास के थानों की भारी पुलिस बल मौके पर पहुंची। डीएसपी ने मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, मृतक के परिजन और कुछ मजदूर अभी भी धरने पर डटे हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • ​तत्काल मुआवजा: मृतक के परिवार को अविलंब 17 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • ​रोजगार की मांग: परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार स्थायी रोजगार मिले।
  • ​सुरक्षा जांच: परियोजना स्थल पर सुरक्षा मानकों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • ​ब्लैकलिस्ट: सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाली दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।

​पीड़ित परिवार ने बताया कि श्यामसुंदर अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल, रिफाइनरी प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।