इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी और खेतों को सिंचित करने वाली महत्वपूर्ण बरगी डायवर्सन परियोजना एक बार फिर बड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विवादों के घेरे में आ गई है। परियोजना के अंतर्गत कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी टनल के निर्माण में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) ने नियमों को ताक पर रखकर केवल एक तकनीकी सलाह के बदले 59 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान कर दिया, जबकि एग्रीमेंट के मुताबिक यह खर्च खुद ठेकेदार कंपनी को उठाना था। इस महा-घोटाले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल मिश्रा ने अब सीधे सीबीआई (CBI) से शिकायत कर जांच की मांग की है।

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दिल्ली मेट्रो को ‘सलाहकार’ बताकर किया खेल, CAG की रिपोर्ट भी दरकिनार

दस्तावेजों के मुताबिक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने दिल्ली मेट्रो को तकनीकी सलाहकार बताया और ठेकेदार के हिस्से का 59 करोड़ रुपया सीधे सरकारी खजाने से भुगतान कर दिया।

चौंकाने वाली बात यह है कि देश की सबसे बड़ी ऑडिट संस्था कैग ने मार्च 2023 में जारी अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में इस परियोजना में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले की बात साफ तौर पर कही थी। CAG ने अपनी आपत्ति में स्पष्ट लिखा था कि मूल एग्रीमेंट में सिर्फ काम पूरा करने का समय बढ़ाने का प्रावधान है, किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वित्तीय सहायता या ठेकेदार के खर्चों का भुगतान सरकार द्वारा करने का कोई नियम नहीं है।

इसके बावजूद नियमों को ठेंगा दिखाते हुए चहेते ठेकेदार को टेंडर की राशि के अलावा 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया।

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18 साल, 8 बार मियाद बढ़ी; 800 करोड़ का प्रोजेक्ट पहुंचा 2000 करोड़ पार

बरगी बांध से निकली नहर को जबलपुर से रीवा तक ले जाने के लिए करीब 129 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर का निर्माण होना था, जिसमें स्लीमनाबाद के पास 11.95 किलोमीटर की टनल बननी है। इस टनल को बनाने का ठेका 18 मार्च 2008 को शुरुआत में 800 करोड़ रुपये में ‘मेसर्स पटेल और SEW’ के ज्वाइंट वेंचर को दिया गया था।

नियमानुसार इस काम को 40 महीनों के भीतर यानी 25 जुलाई 2011 तक पूरा हो जाना था। लेकिन ठेका कंपनी अब तक रिकॉर्ड 8 बार काम की मियाद बढ़वा चुकी है। हर बार समय सीमा बढ़ने के साथ-साथ टनल की लागत भी बढ़ती गई और आज इस टनल परियोजना की लागत 800 करोड़ से बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है, जबकि पूरी बरगी डायवर्सन परियोजना की कुल लागत 5,500 करोड़ से अधिक है।

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पेटी कॉन्ट्रैक्टर को किया ब्लैकलिस्ट

इस पूरे नेक्सस में अधिकारियों की मिलीभगत का एक और बड़ा सबूत सामने आया है। मुख्य ठेकेदार कंपनी ने काम में देरी करते हुए एक के बाद एक कई छोटी कंपनियों को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम सौंप दिया। जब टनल का काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ तो नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने मुख्य जिम्मेदार कंपनी पर कोई ठोस कानूनी एक्शन लेने के बजाय, सिर्फ पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही छोटी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करके अपना पल्ला झाड़ लिया। 18 साल बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश की यह महत्वाकांक्षी योजना आज भी अधूरी है, जिससे लाखों किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं।

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