जगदलपुर। व्यापम द्वारा आयोजित डीएलएड प्रवेश परीक्षा बस्तर जिले में कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जगदलपुर के 12 परीक्षा केंद्रों में परीक्षा आयोजित की गई, जहां 3,891 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 2,962 शामिल हुए। परीक्षा में 76.12 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि 929 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर से जांच की गई। जूते, मोजे, बेल्ट, घड़ी, पर्स और आभूषणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। प्रवेश से पहले पहचान पत्र और प्रवेश पत्र का भौतिक सत्यापन किया गया। काकतीय पीजी कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और दंतेश्वरी महिला कॉलेज प्रमुख केंद्र रहे।

केंद्रों पर प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार निगरानी बनी रही। डिप्टी कलेक्टर और नोडल अधिकारी मनीष वर्मा के नेतृत्व में परीक्षा व्यवस्था संचालित हुई। समन्वयक एवं सहायक समन्वयक ने भी केंद्रों का निरीक्षण किया। किसी प्रकार की गड़बड़ी या व्यवधान की सूचना नहीं मिली। जिला प्रशासन ने परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इंदिरा वार्ड ने फिर दोहराया अपना राजनीतिक रुख
जगदलपुर। नगर निगम के इंदिरा वार्ड क्रमांक-16 के उपचुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर अपना मजबूत जनाधार साबित किया है। भाजपा की सत्ता के बावजूद वार्ड के मतदाताओं ने पुराने राजनीतिक समीकरण नहीं बदले। कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी ने भाजपा के मनोहर दत्त तिवारी को 436 वोटों से हराया। वार्ड में कुल 1542 मतदाताओं में से 1229 ने मतदान किया। करीब 79.7 प्रतिशत मतदान ने चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। कांग्रेस को कुल 814 वोट जबकि भाजपा को 378 मत मिले।
पूर्व पार्षद स्वर्गीय अब्दुल रशीद के निधन के बाद यह उपचुनाव कराया गया था। करीब 23 वर्षों से वार्ड में कांग्रेस का प्रभाव कायम है। चुनाव परिणाम को स्थानीय जनभावनाओं और पुराने भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है। जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विजय जुलूस निकाला। दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया गया। यह परिणाम शहर की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
किराया नहीं तो ताला तय, निगम का बड़ा अभियान
जगदलपुर। नगर निगम ने बकाया किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। संजय बाजार की 15 दुकानों को सील कर निगम ने सख्त संदेश दिया है। कार्रवाई के दौरान 1 लाख 42 हजार 640 रुपये की वसूली भी की गई। निगम के अनुसार करीब 60 दुकानों पर लगभग 40 लाख रुपये किराया बकाया है। दुकानदारों को पहले कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। लंबे समय से बकाया राशि जमा नहीं होने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई।
राजस्व विभाग विशेष अभियान चलाकर बकायेदारों की सूची पर काम कर रहा है। निगम प्रशासन का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी है। आयुक्त के निर्देश पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अन्य बकायेदार दुकानों पर भी जल्द कार्रवाई की तैयारी है। राजस्व विभाग की टीम पूरे अभियान की निगरानी कर रही है। नगर निगम ने समय पर किराया जमा करने की अपील भी की है।
महारानी अस्पताल कर्मियों का अभद्र व्यवहार
जगदलपुर। महारानी अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टाफ नर्स पर मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार के आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी संघ ने मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर को सौंपी है। संघ ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विवाद की शुरुआत एक मरीज के वार्ड में टेबल पंखा रखने को लेकर हुई बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार मरीज की मां स्वास्थ्य विभाग की वरिष्ठ अधिकारी हैं। संघ का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी का परिवार परेशान है तो आम मरीजों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। नर्स पर अन्य वार्डों के कार्यों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सहकर्मियों को धमकाने और मानसिक प्रताड़ना देने की शिकायत भी सामने आई है। संघ ने अस्पताल के कार्य वातावरण पर चिंता जताई है। मामले की प्रतिलिपि अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
छुट्टियां खत्म होने लगीं, लेकिन पूल का इंतजार जारी
दंतेवाड़ा। बचेली के बैलोअप गेस्ट हाउस स्थित स्विमिंग पूल इस बार गर्मी की छुट्टियों में भी शुरू नहीं हो पाया है। हर वर्ष यह सुविधा कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए खोली जाती है। इस बार जून शुरू होने के बाद भी संचालन प्रारंभ नहीं होने से नाराजगी बढ़ रही है। बच्चों के लिए यह गर्मी की छुट्टियों का प्रमुख आकर्षण माना जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि स्विमिंग स्वास्थ्य और शारीरिक विकास से भी जुड़ी गतिविधि है। किरंदुल क्षेत्र में पूल शुरू हो चुका है, जबकि बचेली में स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों क्षेत्र एक ही परियोजना का हिस्सा होने के बावजूद सुविधा में अंतर पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि समान सुविधाएं सभी को मिलनी चाहिए।
कई परिवार छुट्टियों में पूल खुलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रबंधन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। बच्चों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। अब कर्मचारियों की निगाहें एनएमडीसी प्रबंधन के फैसले पर टिकी हैं।
50 करोड़ का सपना, लेकिन रोजगार अब भी इंतजार में
जगदलपुर। जगदलपुर से लगे सेमरा में बना ट्राइफेड फूड प्रोसेसिंग पार्क अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है। करीब तीन साल पहले बड़े उद्देश्यों के साथ शुरू की गई परियोजना अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी है।
26 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पार्क पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। महुआ, इमली, आंवला, शहद और काजू जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग का लक्ष्य रखा गया था। स्थानीय वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने की योजना बनाई गई थी। पार्क शुरू होने से हजारों वनधन समिति सदस्यों को लाभ मिलने की उम्मीद थी। 375 स्व-सहायता समूह और हजारों संग्राहक इससे जुड़े हुए हैं। आधुनिक मशीनें और प्रोसेसिंग इकाइयां तैयार होने के बावजूद उत्पादन गतिविधियां सीमित हैं।
स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीदें भी अधूरी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर निराशा देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन शुरू होने से वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। अब सवाल यह है कि करोड़ों की इस परियोजना को गति कब मिलेगी और रोजगार का सपना कब पूरा होगा।
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