भोजपुर। जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में घटना के सातवें दिन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मृतक भरत की मां आशा देवी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जगदीशपुर के एसडीपीओ (SDPO) राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष (SHO) राजेश कुमार मालाकार और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।
सरेंडर के बाद हत्या का आरोप
भरत की मां आशा देवी ने अपने आवेदन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 जून को शाहपुर पुलिस और जगदीशपुर एसडीपीओ की टीम उनके घर आई और भरत को बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं पर चर्चा के बहाने साथ ले गई। मां का दावा है कि जब भरत ने मौके पर पहुंचकर फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बात रखी और हथियार जमीन पर रखकर आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया, तब पुलिस ने उसे घेरकर 5 गोलियां मारीं।
चौथी FIR और बढ़ता दबाव
इस घटनाक्रम में अब तक कुल चार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इससे पहले तक सरकार और प्रशासन पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने से बच रहा था लेकिन लगातार बढ़ते जनदबाव और परिवार की जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा। आरोपियों पर अब BNS की धारा 103(1)/3(8) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा आरा सर्किल इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपा गया है।
परिजनों का दर्द और न्याय की मांग
आशा देवी ने यह भी बताया कि घटना के दिन उनके पति काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन शाहपुर थाने में हिरासत में रखा गया और शाम को उनके बेटे की मौत की सूचना दी गई। परिजनों का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उसकी हत्या करना कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
अब गिरफ्तारी कब?
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे भोजपुर में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आरोपी एसडीपीओ और एसएचओ की गिरफ्तारी कब होगी? पुलिस विभाग ने हालांकि जांच शुरू कर दी है, लेकिन जनता की निगाहें अब आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच अधिकारी इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाते हैं।

