​आरा। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच के बीच एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। भरत के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट से लगातार वीडियो डिलीट किए जा रहे हैं, जो इस एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने में अहम साबित हो सकते थे।

​साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप

​भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने दावा किया है कि भरत के फेसबुक अकाउंट से अब तक कुल 8 वीडियो हटा दिए गए हैं। इनमें एनकाउंटर के दौरान का वह अंतिम फेसबुक लाइव वीडियो भी शामिल है, जिसमें भरत को पिस्टल फेंकते और पुलिसकर्मियों को उसे उठाने के लिए लपकते हुए देखा जा सकता है। चंदन का कहना है कि उन्होंने इन वीडियो को पहले ही डाउनलोड करके सुरक्षित रख लिया था लेकिन पुलिस की हिरासत में मौजूद मोबाइल से वीडियो डिलीट होना सीधे तौर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का मामला है।

​एसपी ने आरोपों को नकारा

​वहीं, इस मामले पर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी का मोबाइल फोन फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (FSL) के पास है। उन्होंने वीडियो डिलीट होने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे गलत बताया है।

​न्यायिक जांच में गवाहों का बड़ा खुलासा

​इस बीच, बुधवार को आरा में न्यायिक जांच आयोग के समक्ष प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं चंद्रावती देवी और उषा देवी के बयान दर्ज किए गए। उषा देवी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने घटना का आंखों देखा हाल बताना चाहा, तो जांच आयोग के जज ने उन्हें डांट दिया। उषा के अनुसार जब मैं यह कहने वाली थी कि प्रशासन ने भरत को मारा है, तो जज ने टोका और कहा कि क्या तुमने माइक लगाकर सुनी है?
​दूसरी ओर गवाह चंद्रावती देवी ने अपने बयान में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने जांच आयोग को बताया कि घटना के वक्त वे मौके पर मौजूद थीं। उनके मुताबिक, पुलिस ने खुद भरत तिवारी को हथियार फेंकने के लिए कहा था और भरोसा दिलाया था कि उनकी सभी मांगें मान ली जाएंगी। इसके बावजूद भरत का एनकाउंटर होना अब कई बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।