आरा। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। जनआक्रोश और परिजनों की निरंतर मांग के बाद, बिहार सरकार ने आखिरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कदम उठा लिए हैं। राज्य कैबिनेट ने इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस जांच आयोग की कमान पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी गई है, जो एनकाउंटर से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल करेंगे।
महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, सरकार को दी चेतावनी
घटना के विरोध में भोजपुर के बिलौटी गांव में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में जनभागीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां करीब 5,000 गाड़ियों का काफिला पहुंचा था। आक्रोशित लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भरत तिवारी की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो मृतक के श्राद्धकर्म के उपरांत वे बिहार विधानसभा का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। सरकार पर न्याय सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और नेताओं के बयान
इस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सांसद शांभवी चौधरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए आश्वस्त किया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में पीड़ित परिवार को न्याय अवश्य मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी पुलिसकर्मी इस घटना में दोषी पाए जाएंगे उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं मशहूर कलाकार और नेता पवन सिंह आज पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देंगे।
प्रशांत किशोर का सीधा हमला
इस संवेदनशील मुद्दे पर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। बिलौटी की महापंचायत में शामिल होकर उन्होंने जोरदार हुंकार भरी। पीके ने कहा बिहार सम्राट चौधरी के इशारे पर नहीं बल्कि संविधान से चलेगा। उन्होंने मांग की है कि जांच का दायरा विस्तृत होना चाहिए, जिसमें गृह मंत्री की भूमिका, एनकाउंटर का आदेश देने वाले एसटीएफ अधिकारी और गोली चलाने के लिए अधिकृत करने वाले मजिस्ट्रेट तक की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि यह बिहार की जनता का राज है और वे इस एनकाउंटर की परत-दर-परत सच्चाई बाहर लाकर रहेंगे। बहरहाल, अब सबकी निगाहें जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के आयोग पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और इसमें कौन-कौन से अधिकारी दोषी हैं।

