आरा। सरकारी फाइलों की एक त्रुटि ने 82 वर्षीय बुजुर्ग ढोड़ा राम के जीवन में ऐसा भूचाल ला दिया है कि उन्हें अपने ही वजूद का सबूत देने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। पिरौटा गांव निवासी ढोड़ा राम को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है जिसके कारण पिछले तीन महीनों से उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद है।
साहब, मैं जिंदा हूं
ढोड़ा राम और उनकी पत्नी फुसूंद्रा देवी का जीवन पूरी तरह से सरकार द्वारा मिलने वाली पेंशन पर निर्भर है। होली के समय जब वे पंजाब नेशनल बैंक की अपनी शाखा में पेंशन निकालने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं होगा क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किया गया है। यह सुनकर बुजुर्ग स्तब्ध रह गए। वे कहते हैं, साहब, मैं जिंदा हूं। अगर पेंशन नहीं मिली, तो मैं और मेरी बीमार पत्नी क्या खाएंगे?
हादसों और गरीबी से जूझता जीवन
करीब 20 साल पहले मजदूरी के दौरान ढोड़ा राम का पैर टूट गया था जिसके बाद उनके पैर में रॉड डाली गई। अब वे लाठी के सहारे चलने को मजबूर हैं। उनकी कोई संतान नहीं है और उनकी तीन बेटियां विवाहित हैं। उनका घर जर्जर अवस्था में है जो बरसात में टपकता है। एक छोटी सी सरकारी गलती ने उनसे न केवल पेंशन छीनी है, बल्कि उनके सम्मान को भी गहरी चोट पहुंचाई है।
दफ्तरों में दौड़-धूप, पर समाधान नहीं
ढोड़ा राम पिछले तीन महीनों से ब्लॉक कार्यालय और बैंक के चक्कर काट रहे हैं। हर जगह उन्हें एक ही जवाब मिलता है अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र लेकर आइए। जब उन्होंने ऑनलाइन दस्तावेज निकाले, तो उसमें स्पष्ट लिखा था सत्यापन के दौरान लाभार्थी मृत पाया गया। यह पढ़कर बुजुर्ग की आंखों से आंसू छलक आए। उनकी बेटी कमलावती देवी का कहना है कि पिता के बार-बार विनती करने के बावजूद अधिकारी उन्हें एक टेबल से दूसरे टेबल पर टाल रहे हैं।
प्रशासन से न्याय की गुहार
गांव के निवासी मुकेश तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित आवेदन दिया है। उन्होंने बताया कि ढोड़ा राम गांव में सबके सामने जीवित मौजूद हैं फिर भी सिस्टम उन्हें मरा हुआ बता रहा है। अब ढोड़ा राम और उनके समर्थकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मानवीय भूल को सुधारते हुए उनकी पेंशन अविलंब बहाल करेगा ताकि इस बुजुर्ग दंपति का बुढ़ापा भूखे पेट न कटे।

