संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में पकड़ी गई फर्जी महिला IAS अफसर तृप्ति सिंह के मामले में पुलिस पूछताछ में रोजाना नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं को ठगने वाले इस गिरोह का तरीका बेहद हाईटेक था। पुलिस जांच में सामने आया है कि पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार करवाए जाते थे।
लखनऊ से दबोचा गया AI का ‘मास्टरमाइंड’ प्रखर
अशोकनगर जिले की चंदेरी पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाने वाले आरोपी प्रखर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में सामने आया है कि प्रखर ही AI टूल्स का इस्तेमाल करके असली दिखने वाले सरकारी लेटरहेड और जॉइनिंग लेटर तैयार करता था, जिन्हें देखकर कोई भी धोखा खा जाता था।
बहन-भाई का ठगी का नेटवर्क
फर्जी IAS तृप्ति सिंह और उसका भाई सुधांशु सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाते थे। दोनों भाई-बहन का काम शिकार तलाशना और उन्हें झांसे में लेना था, जबकि प्रखर उन्हें AI से बने फर्जी सरकारी दस्तावेज मुहैया कराता था।
‘मजे के लिए शुरू किया काम, बन गए ठग’
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया है। आरोपियों के मुताबिक, शुरुआत में यह काम सिर्फ मजे और रौब जमाने के लिए शुरू किया गया था। सबसे पहले तृप्ति और उसके भाई ने चंदेरी के एक टूरिस्ट गाइड की बेटी को अपना शिकार बनाया और फर्जी कागजात थमा दिए। जब इसमें सफलता मिली और पैसे आने लगे, तो यह एक संगठित ठगी के रैकेट में बदल गया।
7 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर आरोपी
फिलहाल भोपाल की बाग सेवानिया थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 7 सितंबर तक की पुलिस रिमांड ली है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक प्रदेश भर में कितने युवाओं को अपना शिकार बनाया है और ठगी की कितनी रकम ऐंठी है।
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