शिखिल ब्यौहार, भोपाल। अजब नगर निगम की गजब कहानी है। राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर नगर निगम का दोहरा चरित्र खुलकर सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के नाम पर नगर निगम की बड़ी मनमानी भी उजागर हो रही है।
दरअसल, इस पूरे विवाद को जन्म देने वाले दो क्षेत्र हैं – 10 नंबर मार्केट और अरेरा कॉलोनी। यहां के रहवासियों ने ही रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे रसूखदारों के बड़े-बड़े शोरूम, कैफे, जिम और कॉर्पोरेट ऑफिसों के खिलाफ आवाज उठाई थी और न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय ने मामले पर संज्ञान लेते हुए निगम को कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन हकीकत यह है कि नगर निगम इन दोनों ही क्षेत्रों के रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो गया है।
निगम ने अरेरा और 10 नंबर में सिर्फ दिखावे की कार्रवाई की है। यहां चल रहे सैकड़ों बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में से महज 5% छोटे व्यवसायियों को नोटिस जारी कर रस्म अदायगी कर दी गई, जबकि बड़े और रसूखदारों के प्रतिष्ठानों पर निगम की आंखें बंद हैं।
मामले पर याचिकाकर्ता लवनीश भाटी ने बताया कि रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब रुख साफ कर दिया है। लेकिन, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा व्यापारी और जनता दोनों भुगत रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो क्षेत्र पूर्व से ही व्यवसाय के घोषित है वहां भी नगर निगम नोटिस थमने के साथ सीलिंग की कार्यवाही कर रहा है। हमीदिया रोड, चौक बाजार, बैरागढ़ मार्केट, न्यू मार्केट पहले से ही व्यावसायिक क्षेत्र घोषित है।
मास्टर प्लान मैं भी इस बात का सफ्ता पर लेख है कि यह 25 लाख की आबादी का मास्टर प्लान है जिसमें मिक्स लैंड उसे का भी प्रावधान है लेकिन इसके बावजूद व्यापारियों समेत पर्यायवाचियों को अधिकारियों द्वारा ही गुमराह किया गया। इसके परिणाम अब सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि व्यवस्थित शहरी विकास के लिए यह जरूरी है कि रेजिडेंशियल एरिया में कमर्शियल एक्टिविटी नहीं होनी चाहिए।
नगर निगम की दोहरी नीति को लेकर सियासी पारा भी चरम पर है। कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी धनोपिया ने कहा कि नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश समेत नगरीय विकास आवास विभाग की गाइडलाइन का अध्ययन नहीं किया है। जानबूझकर बड़े-बड़े व्यापारियों को छोड़ छोटे व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी कार्यवाही दिखाने के लिए छोटे व्यापारियों पर शिकंजा कस रहे हैं और बड़े व्यापारियों से रिश्वत ले रहे हैं। उधर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता महेश शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही काम किया जा रहा है। सरकार व्यापारी और रहवासियों के हित में ही निर्णय लेना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षर से पालन करना नगर निगम का कर्तव्य है और दायित्व भी।
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