संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन जमीनी हकीकत अब उन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गई। पब्लिक साइकिल शेयरिंग योजना को शहर की आधुनिक पहचान और प्रदूषण कम करने की बड़ी पहल बताया गया था। वही योजना आज बदहाली, लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता का शिकार हो गई है। स्मार्ट सिटी प्रबंधन की पब्लिक साइकिल शेयरिंग परियोजना फेल हो गई है। 

कभी भोपाल की सड़कों पर स्मार्ट सफर का सपना दिखाने वाली ये साइकिलें आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी हैं। करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर शुरू की गई इस योजना का मकसद शहरवासियों को सस्ता, आसान और प्रदूषण मुक्त सफर उपलब्ध कराना था लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही ने इस पूरी योजना को धीरे-धीरे कबाड़ में बदल दिया। अब खाली स्टैंड में सिर्फ जंग खाती साइकिल पड़ी हुई है। शुरुआत में इसे लेकर काफी प्रचार हुआ और दावा किया गया कि इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी तथा लोग छोटे सफर के लिए साइकिल का उपयोग करेंगे।

साल 2017 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गई इस योजना के लिए शहर के प्रमुख इलाकों न्यू मार्केट, एमपी नगर, होशंगाबाद रोड समेत करीब 50 स्थानों पर स्मार्ट साइकिल स्टैंड बनाए गए थे। करीब 500 जीपीएस लैस साइकिल ओर ई बाइक के जरिए लोगों को छोटी दूरी तय करने के लिए बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प देने का दावा किया गया था। लेकिन नगर निगम ओर स्मार्ट सिटी प्रबंधन की यह योजना ने दम तोड़ दिया है।गायब होती सुविधाएं अब सीधे तौर पर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। 

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