कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ लगातार किए जा रहे एनकाउंटर के बावजूद राज्य में आपराधिक घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है। इस स्थिति को लेकर तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता करुणा सागर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से बिहार में अपराध कम नहीं होने वाला है।
अपराधी-नेता का गठजोड़ मुख्य समस्या
करुणा सागर ने तर्क दिया कि अपराध नियंत्रण के लिए सबसे पहले पुलिस को उन ‘आकाओं’ की तलाश करनी चाहिए जो इन अपराधियों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में पनपे अपराधी-राजनेता के गठजोड़ को पूरी तरह से तोड़ना अनिवार्य है। जब तक संरक्षण देने वाली ताकतें खत्म नहीं होंगी, तब तक अपराध की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
दोषी सिद्धि दर बढ़ाना जरूरी
पूर्व डीजीपी के अनुसार, कानून का खौफ तभी पैदा होगा जब अपराधी जेल जाएं और वहां लंबे समय तक रहें। उन्होंने पुलिस को सुझाव दिया कि:
- समयबद्ध चार्जशीट: पुलिस को अपनी जांच पूरी कर समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए।
- तेज ट्रायल: ट्रायल कोर्ट के जरिए सुनवाई प्रक्रिया को तेज कर अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाई जाए।
- सजा की अवधि: जघन्य अपराधों के दोषियों को किसी भी हाल में छूट नहीं मिलनी चाहिए। यदि अपराधी कम से कम 6 से 7 साल के लिए जेल जाते हैं, तो यह अन्य अपराधियों के मन में डर पैदा करेगा।
करुणा सागर का मानना है कि एनकाउंटर एक अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन स्थाई शांति के लिए कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करना ही एकमात्र रास्ता है। पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तभी आम जनता को वास्तविक राहत मिल पाएगी।

