पटना। ​बिहार सरकार राज्य के 534 ब्लॉकों में 572 स्कूलों को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित कर रही है, ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतना ऊंचा हो कि अधिकारी भी अपने बच्चों का दाखिला वहां कराएं। हालांकि अप्रैल 2026 से सत्र शुरू होने के बावजूद इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटकी है।

​शिक्षकों की अरुचि का कारण

मुख्य समस्या यह है कि मॉडल स्कूल और सामान्य स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का वेतनमान एक समान है। शिक्षाविदों का मानना है कि मॉडल स्कूलों में कार्यभार अधिक है लेकिन कोई अतिरिक्त प्रोत्साहन या अलग वेतन संरचना न होने के कारण शिक्षक यहां आने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। मुंगेर का उदाहरण लें तो वहां 216 शिक्षकों की जरूरत के सापेक्ष मात्र 55 आवेदन आए और इंटरव्यू के बाद केवल 6 शिक्षक ही खरा उतर सके।

​नई टाईम-टेबल जारी

शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने फिर से आवेदन का मौका दिया है। अब शिक्षक 1 से 4 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद 5-7 जून तक समीक्षा, 8-12 जून को इंटरव्यू और 13 जून को अंतिम सूची जारी की जाएगी। चयन प्रक्रिया में डीडीसी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी शिक्षकों का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर कर रही है।

​पदों का गणित

मॉडल स्कूलों में कक्षा 9-10 के लिए 6-8 और 11-12 के लिए 14-16 पद स्वीकृत हैं। शिक्षकों का चयन अनुभव, योग्यता और इंटरव्यू के आधार पर किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान हालात बताते हैं कि जब तक सरकार प्रोत्साहन या आकर्षक पे-स्केल की व्यवस्था नहीं करती, तब तक इन स्कूलों में शिक्षकों का पर्याप्त संख्या में पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।