महाराष्ट्र सचिवालय की कैंटीन में बदलाव के बाद अब सरकार ने सरकारी बैठकों के मेन्यू को बदलने की तैयारी की है. अब तली-भुनी चीजों की जगह फल, पोहा, उबले अंडे और इडली-सांभर जैसी हेल्दी चीजों को प्लेट में जगह मिलेगी. महाराष्ट्र में अब सरकारी और अर्धसरकारी बैठकों, सरकारी कार्यक्रमों और उपहारगृहों (कैंटीन) में स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने और उसी तरह का मेन्यू रखना अनिवार्य होगा.
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में परोसे जाने वाले नाश्ते और भोजन को लेकर बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है.
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी बैठकों और कैंटीन के मेन्यू में बड़ा बदलाव किया है. अब सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों और कैंटीन में तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दी जाएगी.
आवश्यकता के अनुसार गर्म दूध,बिना चीनी वाली ग्रीन टी, रागी, ज्वार और बाजरा की रोटी, छाछ, सलाद, विभिन्न सब्जियां, दाल और अंकुरित पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस नीति को मंजूरी दी है.
इस फैसले का असर केवल मंत्रालय की कैंटीन तक सीमित नहीं रहेगा. सरकारी विभागों और संस्थानों के नए कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट में हेल्दी और संतुलित मेन्यू से जुड़े प्रावधान शामिल करना जरूरी किया जाएगा.
सरकार का जोर अब बैठकों में फल, सलाद, दालें और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने का है. सरकार ने स्थानीय और पारंपरिक अनाज को भी मेन्यू में शामिल करने पर जोर दिया है. मंत्रालय की कैंटीन में पहले ही फल, उबले अंडे, उबली दालें, पोहा, इडली-सांभर, गर्म दूध और ग्रीन टी जैसे हेल्दी विकल्प शुरू किए गए हैं। इसके साथ उड़द, हरी सब्जियां, छाछ, सलाद और पुलाव जैसी पौष्टिक चीजों को भी मेन्यू में जगह दी जा रही है.
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