कुमार इंदर, जबलपुर: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कथित तौर पर विभिन्न बीमारियों से लगभग 30 बच्चों की मौत के मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महज समाचार पत्रों की खबरों को आधार बनाकर जनहित याचिकाएं दाखिल न करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को खुद मौके पर जाकर वस्तुस्थिति (ग्राउंड रियलिटी) की पड़ताल करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 9 सितंबर तय की है।

‘अखबार की खबर और ग्राउंड रिपोर्ट में फर्क’

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर निवासी याचिकाकर्ता व अधिवक्ता अंशुल तिवारी को हिदायत दी कि वे खुद बालाघाट जिले के प्रभावित क्षेत्रों—बैहर और बिरसा जाएं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को जमीनी स्तर पर जाकर हकीकत जाननी चाहिए, पीड़ितों व उनके परिवारों से मिलना चाहिए और तथ्यात्मक जानकारी एकत्र कर कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट रखनी चाहिए। इसके बाद ही याचिका पर आगे कोई विचार या आदेश जारी किया जाएगा।

30 बच्चों की मौत का दावा

याचिका में दावा किया गया है कि बालाघाट के आदिवासी इलाकों में खसरा, मलेरिया और कुपोषण जैसी मल्टीपल बीमारियों व संक्रमण के कारण 30 बच्चों की जान जा चुकी है। अस्पताल में जगह की कमी: याचिका में कहा गया है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है और 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज चल रहा है। इलाज में लापरवाही: स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।

हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

क्षेत्र की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत अब याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर 9 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।

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