Central Government Takes Over Jaipur Polo Ground in Delhi: दिल्ली के जयपुर पोलो ग्राउंड को केंद्र सरकार ने अपने अधिन ले लिया है। केंद्र सरकार के भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परिसर को सील कर दिया है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मुख्य प्रवेश द्वार पर सील लगाई और नोटिस भी चस्पा किया। केंद्र सरकार ने यह कार्रवाई दिल्ली की एक अदालत की तरफ से इंडियन पोलो एसोसिएशन यानी आईपीए (IPA) को झटका लगने के बाद की है। कोर्ट ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (को केंद्र सरकार के उस आदेश के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्हें मैदान खाली करने के लिए कहा गया था।
इस पोलो ग्राउंड को जयपुर के महाराज ने दिल्ली पोलो एसोसिएशन को गिफ्ट किया गया था। सरकार का दावा है कि इसकी लीज वर्ष 1993 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद से जमीन पर अवैध कब्जा बना हुआ था। मामले को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी, लेकिन अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने लगभग 68 एकड़ में फैली इस भूमि का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
केंद्र सरकार की कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को सेशन कोर्ट ने बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। भारतीय पोलो संघ ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत जारी बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए उसके अमल पर रोक लगाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इसी तरह की राहत की मांग पहले भी उच्च अदालतों में की जा चुकी है। कहीं से भी राहत नहीं मिली है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक अनुशासन और प्रक्रिया का पालन करते हुए वह बेदखली आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।
17 जून को मामले में होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपील और स्टे एप्लीकेशन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 17 जून को वेकेशन जज के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया है।केंद्र ने कोर्ट को बताया है कि पोलो ग्राउंड और दिल्ली जिमखाना क्लब सहित आस-पास के प्रतिष्ठानों के कब्जे वाली जमीन को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।
केंद्र सरकार ने रखा अपना पक्ष
वहीं मामले में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट में कहा कि 1951 में 20 साल के लीज के बाद 1993 में लीज खत्म हो गई थी। उसके बाद से भारतीय पोलो संघ ने इस ग्राउंड पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इससे पहले 8 जून को केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह 12 जून तक किसी भी प्रकार की जबरन बेदखली की कार्रवाई नहीं करेगी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था और कहा था कि फिलहाल बेदखली आदेश को लागू करने की कोई तत्काल योजना नहीं है।
1930 में हुई थी इसकी शुरुआत
लुटियंस दिल्ली में दिल्ली रेस क्लब के साथ की भूमि पर जयपुर पोलो ग्राउंड बना है। इसकी शुरुआत आजादी से पूर्व वर्ष 1930 में हुई थी। जब जयपुर के महाराज ने इस खेल के लिए दिल्ली में भूमि उपलब्ध कराई थी। इसी कारण इसका नाम जयपुर पोलो ग्राउंड पड़ा।आजादी के बाद वर्ष 1951 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इस भूमि को दिल्ली पोलो क्लब को 20 वर्षों के लिए पट्टे पर दे दिया। समय-समय पर इसका पट्टा बढ़ाया जाता रहा। वर्ष 1993 में इसका पट्टा समाप्त हो गया था। इसी के चलते केंद्र सरकार ने मार्च में इसमें बेदखली की प्रक्रिया शुरुआत की थी।
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