रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में आज परिवर्तन की ताजी हवा बह रही है। यह बयार प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील और सक्रिय नेतृत्व की देन है। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार ने “सुशासन” के नारों को ज़मीनी हकीकत बना दिया है। माओवाद की छाया में सिमटे रहने वाले बस्तर और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में अब विकास और विश्वास की नई कहानी लिखी जा रही है।

कंदाड़ी से उठती उम्मीद की रोशनी

नक्सल प्रभाव के कारण प्रशासन की पहुंच से दूर रहने वाले कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड का एक सुदूर ग्राम पंचायत कंदाड़ी आज सुशासन की नई मिसाल बन चुका है। “सुशासन तिहार” और “बस्तर मुन्ने” कार्यक्रम के माध्यम से प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि सरकार की मंशा धरातल पर उतर चुकी है।

कोटरी नदी पार कर अधिकारियों का कंदाड़ी गांव तक पहुंचना, आम के पेड़ के नीचे गाँव वालों का चौपाल लगाना और उनसे सीधे संवाद करना एक प्रशासनिक गतिविधि होने के साथ ही भरोसे और विश्वास का निर्माण भी है जो वर्षों से उपेक्षित ग्रामीणों के दिलों में सरकार के प्रति विश्वास जगा रहा है।

महतारी वंदन योजना से बदली महिलाओं की जिंदगी

कंदाड़ी गांव की सोनकाय बाई कचलामी की कहानी सुशासन से हुए इस बदलाव की सबसे सशक्त तस्वीर पेश करती है। “महतारी वंदन योजना” में हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि ने उनके जीवन में आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय जोड़ा है। महतारी वंदन योजना के बाद अब उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। अब वे खुद घर के कुछ जरूरी सामान खरीद पाती हैं। खेती से होने वाली आय के साथ जुड़कर महतारी वंदन योजना की सहायता उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को और भी मजबूत बना रही है। सोनकाय बाई का कहना कि “अब हमें लगता है कि सरकार सच में हमारे लिए काम कर रही है” सोनकाय बाई जैसी हितग्राही की संतुष्टि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की एक बड़ी सफलता है।

अबूझमाड़ तक भी जा पहुंचा सुशासन

देश के सबसे दुर्गम इलाकों में गिने जाने वाले नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र भी आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। “सुशासन तिहार” के माध्यम से छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यहां अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

उर्मिला पांडे

उर्मिला पांडे और सुखियारिन सलाम जैसी महिलाओं को पहली बार उनके अधिकारों की पहचान कराते हुए राशन कार्ड दिया गया है। राज्य सरकार की इस दसस्तक के बाद वर्षों से जो परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली से वंचित थे अब वे सस्ती दर पर खाद्यान्न प्राप्त कर रहे हैं।

उर्मिला पांडे का कहना है कि महंगे राशन के साथ परिवार चलाना मुश्किल हो जाता था। मगर अब शासन की योजना से उन्हें काफ़ी राहत मिली है। वहीं सुखियारिन सलाम कहती हैं “अब लगता है कि सरकार सच में हमारे गांव तक पहुंच रही है।”

सुशासन तिहार बन गया है विश्वास का पर्व

“सुशासन तिहार” एक ऐसा प्रशासनिक अभियान है जो आज जन-जन तक पहुंचने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। “सुशासन तिहार”के तहत प्रशासनिक टीम गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुन रही हैं और मौके पर ही उनका समाधान कर रही हैं।

सोनकाय बाई

आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, आधार, पेंशन, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक सेवाएं अब लोगों को अपने ही गांव में उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है बल्कि लोगों का प्रशासन पर विश्वास भी बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “कोई भी पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित न रहे”, उनकी यही सोच इस अभियान की आत्मा है। आज बस्तर और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में भी लोग खुद को विकास की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खुल रही विकास की नई राह

नक्सलवाद के कारण विकास से अछूता रह जाने वाले बस्तर क्षेत्र में आज सड़कों का निर्माण हो रहा है, स्कूल फिर से खुल रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो रही हैं। सुशासन तिहार के तहत होने वाले इस परिवर्तन के पीछे राज्य के मुखिया की स्पष्ट नीति और मजबूत इच्छाशक्ति स्पष्ट नजर आती है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह साबित किया है कि यदि शासन की इच्छा शक्ति मज़बूत हो और प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो तो कठिन परिस्थितियों में भी बदलाव संभव है। कंदाड़ी और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच यह संदेश दे रही है कि छत्तीसगढ़ की साय सरकार हर राज्य के पटएक नागरिक के साथ खड़ी है।

महिलाओं और ग्रामीणों का सशक्तिकरण

यह बात उल्लेखनीय है कि सरकार की योजनाओं का सबसे ज़्यादा प्रभाव महिलाओं पर दिखाई दे रहा है। उसके पीछे की वजह है जहां महतारी वंदन योजना उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है वहीं राशन कार्ड, पेंशन और स्वास्थ्य योजनाओं ने उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने का काम कर रहीं हैं। राज्य की साय सरकार के प्रति कृतज्ञ ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन खुद उनके पास आ रहा है। दरअसल सुविधाओं में होने वाले इस बदलाव की शुरुआत सरकार के सोच में होने वाली बदलाव से हुई है।

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