भोपाल। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग अंतर्गत श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास की ओर से 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। 

इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहां श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। भोपाल की कविता शाजी एवं समूह द्वारा श्रीकृष्ण नृत्य नाटिका, उज्जैन के डॉ. आशीष मेहता द्वारा मलखंब, सागर के जुगल किशोर नामदेव द्वारा फूलों की होली और जबलपुर के तनिष्क शुक्ला एवं ग्रुप भजन गायन की प्रस्तुति देंगे। 

जन्मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमिपूजन किया जायेगा। यह जानकारी मध्‍यप्रदेश के संस्‍कृति राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र सिंह लोधी ने प्रेस कॉन्‍फ्रेन्‍स में दी। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्रीजी के सांस्‍कृतिक सलाहकार एवं श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्री श्रीराम तिवारी एवं संचालक, संस्‍कृति एन.पी. नामदेव भी उपस्थित थे।

संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है।

संचालक, संस्‍कृति एन.पी. नामदेव ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। 

उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं।

किस स्‍थल पर क्‍या आयोजन? नारायणा धाम, 

उज्‍जैन में पांच दिवसीय आयोजन

भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की भावपूर्ण स्मृति से जुड़ा स्थल नारायणा धाम मंदिर प्रांगण, नारायणा (उज्जैन) में 02 से 06 सितम्बर तक सायं 7 बजे से पांच दिवसीय आयोजन होगा। यहाँ प्रथम दिवस गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े उस प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा आश्रम के लिए जंगल में लकड़ियां चुनने गए थे और सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने की कथा को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर गौरी प्रिया, ग्वालियर भरतनाट्यम और माधवी मधुकर झा, वृंदावन भजन गायन की प्रस्तुति करेंगी। अंत में ‘रासलीला : श्रीकृष्‍ण की दान लीला’ धरनीधर शर्मा – वृंदावन के निर्देशन में होगी। 

दूसरे दिन  मुंबई की प्रशस्ति मानेसर कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका और दमोह के नितिन अग्रवाल भजन गायन प्रस्तुत करेंगे। अंत में ‘रासलीला : श्रीकृष्‍ण की माखन चोरी’ धरनीधर शर्मा वृंदावन के निर्देशन में होगी। तीसरे दिन रोजलिन सुंदराय, भुवनेश्वर द्वारा ओडिसी शैली में कृष्ण पर आधारित नृत्‍यनाटिका और सुश्री वाणी राव, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। अंत में ‘रासलीला : श्रीकृष्‍ण जन्‍म एवं बाल लीला’ धरनीधर शर्मा वृंदावन के निर्देशन में होगी। चतुर्थ दिवस मुकेश दरबार, बुरहानपुर द्वारा श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग नृत्‍य नाट्य और आस्था गोस्वामी, लखनऊ द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। पंचम दिवस अभिलाषा तिवारी, भोपाल द्वारा गीता उपदेश पर केंद्रित नृत्य-नाटिका और विवेक अग्रवाल, इंदौर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। आयोजन के सभी पाँचों दिवस गिरधर गोपाल शर्मा, वृंदावन द्वारा रासलीला का मंचन भी किया जाएगा।

सांदीपनि आश्रम, उज्‍जैन में गुरु-शिष्य परंपरा पर केंद्रित प्रस्तुतियाँ

सांदीपनि आश्रम, उज्जैन में 02 से 04 सितम्बर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। प्रथम दिवस डॉ. लता मुंशी, भोपाल द्वारा ‘कर्षति इति कृष्ण’ एवं चरणजीत सिंह सौंधी, मुंबई द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस अनुराग त्रिपाठी, भोपाल द्वारा बघेली लोकगायन एवं अखिलेश तिवारी, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। तृतीय दिवस भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने, 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका गीता पिल्लई, इंदौर द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही इशिता विश्वकर्मा, मुंबई द्वारा भजन गायन होगा।

महिदपुर, उज्‍जैन में कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत की छटा

रामलीला चौक, महिदपुर (उज्जैन) में 02 से 04 सितम्बर तक सायं 7 बजे से तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रथम दिवस कल्याणी-वैदेही फगरे द्वारा राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर आधारित नृत्‍य प्रस्तुति एवं ओमप्रकाश श्रीवास्तव, मुंबई द्वारा भक्ति गायन होगा। द्वितीय दिवस गयाप्रसाद प्रजापति, रायसेन द्वारा बुंदेली गायन और जानकी बैण्‍ड, जबलपुर द्वारा भक्ति गायन प्रस्तुत किया जाएगा। तृतीय दिवस बृजेन्द्र ब्रज, इंदौर द्वारा भजन गायन के साथ महिदपुर की श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी परंपरा को केंद्र में रखकर नूपुर माहौर, भोपाल द्वारा श्रीकृष्ण जन्म पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।

उज्‍जैन के दो प्रमुख मंदिरों में भी गूंजेगा कृष्‍ण नाम

श्री गोपाल मंदिर, उज्जैन में 4 सितम्‍ब्‍र, 2026 को सायं 7 बजे से द्वारकाधीश्वर स्वरूप में प्रतिष्ठित भगवान श्रीकृष्ण की लोकआस्था से जुड़े इस प्रमुख मंदिर में गीत गोविंद पर केंद्रित नृत्य-नाटिका तेजस फाउंडेशन, मुंबई द्वारा तथा आकृति मेहरा, भोपाल द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। श्रीकृष्ण मंदिर, तराना, उज्जैन में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से शीला त्रिपाठी, भोपाल द्वारा लोक में भक्ति गायन एवं करण सिंह गुर्जर, तराना द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी।

पन्ना और अमझेरा में श्रीकृष्ण के विविध प्रसंग होंगे साकार

श्री बलदेवजी मंदिर परिसर, पन्ना में 02 सितम्बर को सायं 7 बजे से मिली वर्मा, भोपाल द्वारा बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं विकास सिरमोलिया, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। जुगल किशोर मंदिर प्रांगण, पन्ना में 03 एवं 04 सितम्बर को सायं 7 बजे से दो दिवसीय आयोजन में प्रथम दिवस रंग त्रिवेणी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका का मंचन एवं अंकिता कैलासिया, ग्वालियर द्वारा भक्ति गायन होगा। द्वितीय दिवस श्रीकृष्ण भक्ति की प्रणामी परंपरा पर केंद्रित नृत्य-नाटिका जान्हवी सिंह, रीवा द्वारा भरतनाट्यम शैली में प्रस्तुत की जाएगी एवं दामिनी पठारिया, नर्मदापुरम द्वारा भजन गायन की प्रस्‍तुति होगी।

अमझेरा में रुक्मिणी वरण पर नृत्‍यनाटिका

श्रीकृष्‍ण द्वारा रुक्मिणी वरण का प्राचीन एवं पावन स्‍थल अमझेरा (धार) में थाना परिसर के पीछे 03 एवं 04 सितम्बर को सायं 7 बजे से हरीश शर्मा, भोपाल द्वारा श्रीकृष्ण लीला पर आधारित नृत्य-नाटिका एवं शर्मा बंधु, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस आकृति सोनी, इंदौर द्वारा भजन गायन और अमझेरा से जुड़े रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर दुर्गा मिश्रा, भोपाल द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।

एक दिवसीय आयोजनों में प्रदेशभर में गूंजेगी कृष्ण भक्ति

मां बिरासनी क्रिकेट स्टेडियम, पाली (उमरिया) में 04 सितम्बर को सायं 7 बजे से शर्मिष्ठा रानी पांडा, भुवनेश्वर द्वारा मथुरा प्रवेश प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति एवं अखिलेश राजा, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। जनपद पंचायत सभागार, शहडोल में 04 सितम्बर को सायं 7 बजे से मणिमाला सिंह – रीवा द्वारा बघेली गायन, शांभवी शुक्ला मिश्रा – सागर द्वारा कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं प्रभंजय चतुर्वेदी, दुर्ग द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। ज्ञानदीप इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्‍कूल, मण्डला में 04 सितम्बर को सायं 7 बजे से डॉ. नेहा विश्वकर्मा, जबलपुर द्वारा गोवर्धन धारण केन्द्रित नृत्‍य नाटिका एवं मोहिनी मोघे, जबलपुर द्वारा सुदामा मिलन प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। अंत में रूद्रकांत ठाकुर, सिवनी द्वारा भजन गायन होगा।

जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग पर केन्द्रित प्रदर्शनी

परशुराम जी की जन्‍मस्‍थली एवं वह स्‍थल जहाँ भगवान श्रीकृष्‍ण को परशुराम जी से सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई, ऐसे पावन स्‍थल जानापाव (महू) में भगवान परशुराम एवं भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंग पर आधारित विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी। जानापाव की पावन भूमि पर 04 दिसम्बर, 2026 को सायं 4 बजे से भगवान परशुराम जी द्वारा भगवान श्रीकृष्‍ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किये जाने पर केंद्रित नृत्य नाटिका की प्रस्‍तुति होगी, जिसे पूर्वी नगाइच, नर्मदापुरम द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। अंत में अभिषेक गावड़े एवं ग्रुप, इंदौर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। यहाँ विशेष रूप से भगवान परशुराम-श्रीकृष्‍ण प्रसंगों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

लोकगायन, भजन और नृत्य-नाटिकाओं का होगा अद्भुत संगम

जन्‍माष्‍टमी के पावन अवसर पर आयोजित ‘श्रीकृष्‍ण पर्व’ के अंतर्गत 4‍ सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से मानस भवन, दमोह में अनामिका पाण्‍डेय छतरपुर द्वारा बुंदेली लोकगायन, बिथिका मिष्ठी, भोपाल द्वारा कालियानाग मानमर्दन पर केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं पवन तिवारी – टीकमगढ़ द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम, रीवा में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से कल्याणी मिश्रा – रीवा द्वारा बघेली लोकगायन, आस्था सिजारिया, कटनी द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं वैशाली रायकवार, भोपाल द्वारा भजन गायन की प्रस्‍तुति होगी। श्रीराधा-कृष्ण मंदिर, खातेगांव (देवास) में 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से सुश्री शालिनी खरे, जबलपुर द्वारा जामवंत एवं श्रीकृष्ण प्रसंग पर केंद्रित नृत्‍य नाटिका एवं मुस्कान चौरसिया, बालाघाट द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति दी जाएगी।

अन्य स्थलों पर भी सजेगा कृष्णमय सांस्कृतिक उत्सव

श्रीकृष्‍ण पर्व के अंतर्गत 4 सितंबर, 2026 को मुरली मनोहर मंदिर, आगर-मालवा में सुंदरलाल मालवीय, उज्जैन द्वारा भक्ति गायन एवं कशिश सितलानी, उज्जैन द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। जामगढ़, जिला रायसेन में 2 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से शिरीष राजपुरोहित, उज्जैन के निर्देशन में श्रीकृष्ण केंद्रित महानाट्य एवं मोहित शेवानी एवं दल, भोपाल द्वारा स्टोरी टेलिंग ‘कृष्णायन’ की प्रस्‍तुति होगी। वहीं, श्रीकृष्‍ण जी मंदिर, मेर मोहल्‍ला, राघौगढ़, जिला गुना में 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से हीना वासेन एवं साथी, उज्जैन द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं नितिन अखंड, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। श्रीराधाकृष्ण मंदिर, भितरवार, जिला ग्वालियर में 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से ईशान मिनोचा, जबलपुर द्वारा भजन गायन एवं दीपिका पुरोहित, भोपाल द्वारा भक्ति गायन प्रस्तुत किया जाएगा। श्रीराधा-माधव मंदिर, बिजावर, जिला छतरपुर में 4 सितम्‍बर, 2026 को मनीष कुमार चौधरी, कटनी द्वारा भजन गायन एवं अनुष्का जोशी, देवास द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। श्रीराधा-कृष्ण मंदिर, बदरवास, जिला शिवपुरी में 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से दीक्षा अस्थाना, भोपाल द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं मनीष अग्रवाल, जबलपुर द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। श्रीनाथद्वार जी मंदिर, झाबुआ में 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से डॉ. गीता शर्मा, इंदौर द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं संजो बघेल, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। सांवलिया जी मंदिर, रामलीला मैदान खोर दरवाजा, जावद-जिला नीमच में 4 सितम्‍बर, 2026 को पूर्णिमा चतुर्वेदी, भोपाल द्वारा लोकगायन एवं नम्रता कुशवाह एवं साथी, भोपाल द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। 

द्वारकाधीश मंदिर के सामने, मनासा-जिला नीमच में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से प्रतिमा गोस्वामी, भोपाल द्वारा भजन गायन एवं दीपिका सिंह, इंदौर द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। श्रीराधाकृष्ण मंदिर, मल्हारगढ़, जिला मंदसौर में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से सन्नाली शर्मा एवं समूह, इंदौर द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं दीपक कुमार राव एवं समूह, मंदसौर द्वारा भजन गायन होगा। चक्रधारी मंदिर, अम्बाह-जिला मुरैना में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से संघमित्रा तायवाड़े, भोपाल द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं साधना जेजुरीकर, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। श्री नाथ जी की हवेली, खिलचीपुर-जिला राजगढ़ में 4 सितंबर, 2026 को सायं 7 बजे से अदिति तिवारी, उज्जैन द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं राहुल गंधर्व, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। वहीं, चौबीस अवतार मंदिर परिसर, देपालपुर-जिला इंदौर में कपिल शर्मा एवं समूह, भोपाल द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं डॉ. वाणी साठे जोशी, उज्जैन द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी।

मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ

जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकारों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक दल भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। खरगौन जिले में प्रहलाद पटेल की प्रस्तुति राधा कृष्ण मंदिर, पीपलझर में, समीर केवट की सत्यनारायण मंदिर, बड़वाह में, गणेश केवट की राधा कृष्ण मंदिर, पिपलिया बुजुर्ग में तथा शुभम साकरोदिया की राधा कृष्ण मंदिर, सनावद में होगी। बड़वानी के राधा कृष्ण मंदिर, ओझर में आदर्श पाटीदार और खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित नमः शिवाय मिशन शिव कोठी में साजल प्रस्तुति देंगे। राजगढ़ जिले में नरसिंहगढ़ के श्री राधा कृष्ण मंदिर में अनीता देवी चौहान तथा ब्यावर स्थित राधा कृष्ण मंदिर एवं गोपेश्वर महादेव मंदिर में रवि कुमार प्रसाद प्रस्तुति देंगे।

बैतूल जिले के पाथाखेड़ा स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में कुंवर प्रसाद, सीहोर के स्वामीनारायण मंदिर में रीमा देवी और भोपाल जिले के हिंगोनी बैरसिया स्थित श्री राधा कृष्ण सरकार मंदिर में शैलेंद्र कुमार चौहान प्रस्तुति देंगे। मंदसौर के चंद्रपुरा स्थित राधा कृष्ण मंदिर में सतीश हाड़ा, रतलाम के जावरा स्थित रणजीत हनुमान मंदिर में पंकज वर्मा तथा रतलाम के पैलेस परिसर स्थित श्री राधे श्याम मंदिर में राजीव शर्मा एवं शर्मा बंधु अपनी प्रस्तुति देंगे।

उज्जैन जिले में नागदा जंक्शन के मेहतवास स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर में नागेश्वर काठा एवं कमल काठा, महिदपुर के श्री राधा कृष्ण मंदिर में रामचंद्र प्रस्तुति देंगे। नीमच के शिव राम कृष्ण मंदिर में नवीन गंधर्व तथा आगर-मालवा के श्री राम मंदिर में हेमंत जोशी गायक प्रस्तुति देंगे। राजगढ़ के बावड़ी मंदिर में राहुल मंडवाल, नरसिंहपुर के साईखेड़ा स्थित श्री राम राधाकृष्ण मंदिर में योगेश मेहरा तथा रायसेन के बाड़ी स्थित राधा वल्लभ मंदिर में अभिषेक श्रीवास्तव की प्रस्तुति होगी।

राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित राधाकृष्ण मंदिर में अजय तथा बैतूल जिले के बरेठा स्थित राधे कृष्ण मंदिर में विजय राम प्रस्तुति देंगे। ग्वालियर के द्वारकाधीश मंदिर में कम्पूवाले उमेश एवं साथी तथा गंगा दास की बड़ी शाला में पीयूष ताम्बे प्रस्तुति देंगे। भिंड के बजरिया स्थित राधा बल्लभ मंदिर में सुदीप भदौरिया एवं साथी, शिवपुरी के सिद्धेश्वर मंदिर में यखलेश बघेल एवं साथी तथा गुना के गोपाल मंदिर में ममता गौर एवं साथी प्रस्तुति देंगे।

दतिया जिले के नंद किशोर जी के मंदिर में राजेश लिटोरिया एवं साथी तथा सेवड़ा के बिहारी जी मंदिर में भानू श्रीवास्तव एवं साथी प्रस्तुति देंगे। रायसेन के सुल्तानगंज स्थित राम जानकी मंदिर में रामाधार साथी, सोठिया बेगमगंज स्थित राधा कृष्ण मंदिर में मलय व साथी, रसूलपुर त्योंदा स्थित राधाकृष्ण मंदिर में राजकिशोर व साथी तथा गैरतगंज के मेहगवा स्थित राधा कृष्ण मंदिर में दीपक व साथी की प्रस्तुतियां होंगी।

विदिशा जिले के सुआखेड़ी, गुलाबगंज स्थित कृष्ण मंदिर में संतोष व साथी तथा खाटू श्याम मंदिर में विकास कुमार प्रस्तुति देंगे। सागर जिले के जैसीनगर स्थित बिहारी जी मंदिर में पप्पू ठाकुर व साथी, बिलहरा के देव जानकी बड़ा मंदिर में विपिन व साथी, तिली वार्ड स्थित राधा कृष्ण चौपड़ा मंदिर मेंश्री रूपनारायण व साथी तथा लक्ष्मी नारायण पहलवान बाबा मंदिर में भूपेन्द्र प्रजापति व साथी प्रस्तुति देंगे। भोपाल के लक्ष्मीनारायण बिड़ला मंदिर में तनीष्क शर्मा, हरदा के गोलापुरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में सोनू दुबे, रायसेन के तिप्ता बाजार स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में हेमलता दुबे और सांची स्तूप गेट के पास स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में जुगनू कुमारी प्रस्तुति देंगी। 

सतना के चित्रकूट स्थित श्री राम जानकी मंदिर में जय प्रकाश मिश्रा तथा मुख्तियार गंज स्थित व्यंकटेश मंदिर में रमाकांत त्रिपाठी की प्रस्तुति होगी। मैहर के श्री राम जानकी मंदिर, बड़ा अखाड़ा आश्रम में ऋषभ त्रिपाठी, रीवा के लक्ष्मण बाग मंदिर में विनायक सिंह बघेल, सिंगरौली के विंध्य नगर स्थित सर्वेश्वर मंदिर में विशंभर प्रसाद शुक्ला तथा सीधी के दक्षिण करौंदिया स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में आदर्श मिश्रा प्रस्तुति देंगे। कटनी के आजाद चौक, गाटर घाट रोड स्थित राम मंदिर में हेमंत गौतम और छिंदवाड़ा के छोटा बाजार स्थित श्री कृष्ण मंदिर में जूही रावत प्रस्तुति देंगी।

अलीराजपुर के नीम चौक स्थित नरसिंह मंदिर में चन्द्रपाल सिंह ठाकुर, पांढुर्णा के सावरगांव पेठ स्थित राधा कृष्ण मंदिर में दिलीप रावत, शाजापुर के वजीरपुरा मोहल्ला स्थित राधा कृष्ण मंदिर में विपिन नामदेव तथा अशोकनगर के पुराने बाजार स्थित राधा कृष्णा मंदिर में कुमारी निधि प्रस्तुति देंगी। झाबुआ के तुलसी गली स्थित माजिसा राधा कृष्ण मंदिर में अजुन पवार और धार के त्रिमूर्ति नगर स्थित साँवरिया सेठ मंदिर देव स्थान में शुभम व्यास की प्रस्तुति होगी।

सीहोर जिले के बुधनी स्थित राधा कृष्ण मंदिर में अनुराग त्रिपाठी, देवास के चामुंडा नगर स्थित राधा कृष्णा मंदिर में कृष्णपाल सिंह, मऊगंज के रतनगमा स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में मुनीद्र मिश्रा तथा सिवनी के सीला देही स्थित श्री द्वारकाधीश राधा कृष्ण मंदिर में सुमित दुबे प्रस्तुति देंगे। नरसिंहपुर के महाजनी वार्ड स्थित श्री देव राधाबल्लभ मंदिर में श्री जांकी बैंड एवं नाट्य लोक सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था और उमरिया के बांधवगढ़ स्थित सागरेश्वर नाथ मंदिर में संदेश नाट्य मंच समिति प्रस्तुति देगी। बालाघाट के गोंदिया रोड, हनुमान चौक स्थित रामकृष्ण मंदिर में गौरी विश्वकर्मा, शहडोल के धनपुरी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में दीपक कुमार बंसकार तथा अनूपपुर के अमरकंटक स्थित रामकृष्ण कुटीर में बृजेस कोरी प्रस्तुति देंगे। मंडला के बुधवारी चौक स्थित राधा कृष्ण मंदिर में विकास पटेल और डिंडोरी के गांधी चौक स्थित राधा कृष्ण मंदिर में वंदना टांडिया की प्रस्तुति होगी।

बुरहानपुर के नेपानगर स्थित श्री राम मंदिर प्रांगण में मीरा वैश्नव तथा निवाड़ी के मुख्य बाजार, आंबेडकर चौराहा स्थित खंडिया वाले हनुमान जी मंदिर में उदय प्रताप सिंह प्रस्तुति देंगे। देवास जिले के भोरासा, सोनकच्छ स्थित कृष्ण मंदिर में स्वाति मिश्रा, नर्मदापुरम के पिपरिया स्थित राधा कृष्ण मंदिर में शुभांगी शर्मा तथा टीकमगढ़ के कुण्डलेश्वर में हरिचरण प्रस्तुति देंगे।

भोपाल के साकेत नगर स्थित सामेश्वर महादेव मंदिर में विकास सिरमोलिया एवं साया कल्चरल एवं वेल्फेयर सोसाइटी, जबलपुर के गुजराती कॉलोनी, गंगा नगर, गढ़ा स्थित राधा कृष्ण मंदिर में कमलेश यादव एवं संस्कार कला संघ प्रस्तुति देगा। राजगढ़ जिले के खुजनेर, ब्यावरा स्थित मालवा का खाटू श्याम मंदिर में प्रेम सिंह दिपालपुरिया तथा उज्जैन के इस्कॉन मंदिर में खुशबू पांचाल प्रस्तुति देंगी।

भोपाल के शिवाजी नगर स्थित कृष्ण प्रणामी मंदिर में अपर्णा शर्मा, रायसेन जिले के मंडीदीप स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में जी.के. पाठक तथा औबेदुल्लागंज स्थित श्री कृष्ण शिव मंदिर परिसर में फूल सिंह मांडरे प्रस्तुति देंगे। मुरैना के पुलिस लाइन स्थित राधा कृष्ण मंदिर में अनिल दंडोतिया की प्रस्तुति के साथ 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह क्रम पूरा होगा।

प्रदेशभर में श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा किये जा रहे कार्य

·         मध्यप्रदेश की 230 विधानसभाओं में गीता भवन की स्थापना का लक्ष्‍य- इंदौर, जबलपुर, उज्‍जैन में स्‍थापित

·         सांदीपनि आश्रम, उज्‍जैन का विकास

·         अमझेरा में श्रीकृष्ण रूक्मिणी लोक एवं श्रीकृष्ण लीला गुरुकुल की स्थापना

·         नारायणा में अंतर्राष्ट्रीय सांदीपनि वैदिक गुरुकुल की स्थापना

·         जानापाव में भगवान श्री परशुराम एवं श्रीकृष्ण लोक की स्थापना

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के उद्देश्‍य

·         मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की यात्राओं से जुड़े स्थलों की पहचान, विकास, संरक्षण तथा उनका अभिलेखन, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्मांकन एवं चित्रांकन।

·         इन स्थलों के मंदिरों, जल संरचनाओं, वन संपदा एवं उद्यानों का संरक्षण तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार।

·         उज्जैन में 14 विद्याओं एवं 64 कलाओं की औपचारिक शिक्षा हेतु सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना।

·         सभागार, सामुदायिक भवन तथा धर्मशालाओं का निर्माण एवं संचालन।

·         शिक्षा, संस्कृति, कृषि तथा गौ एवं पशुधन पालन की विरासत का विकास।

·         नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण की कथा एवं यात्रा स्थलों से भावनात्मक तथा अनुभवात्मक रूप से जोड़ना।

·         पर्यटकों, शोधार्थियों, युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, संग्रहालय तथा सूचना केंद्रों की स्थापना।

·         उन ऋषियों, संतों, विचारकों, कवियों, लेखकों, कलाकारों एवं वैज्ञानिकों के योगदान का अभिलेखन जिन्होंने श्रीकृष्ण को जगद्गुरु के रूप में स्थापित किया।

भगवान श्रीकृष्‍ण से जुड़े मध्‍यप्रदेश के प्रमुख स्‍थलों के बारे में

सांदीपनि आश्रम, उज्‍जैन

उज्‍जैन का नाम आते ही बाबा महाकाल का नाम ध्‍यान में आ जाता है, लेकिन यही वह भूमि भी है जहाँ भगवान श्रीकृष्‍ण ने अपने जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण अध्‍याय लिखा। मान्‍यता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण सांदीपनि आश्रम में 64 दिवस तक रहे। इस अवधि में उन्‍होंने 14 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्‍त किया। परंपराओं के अनुसार उन्‍होंने चार दिनों में चार वेद, 18 दिनों में पुराण और  छह दिनों में छह शास्‍त्रों का अध्‍ययन किया। मान्‍यता है कि इसी आश्रम में भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्‍ण का दिव्‍य मिलन हुआ था। भारतीय संस्‍कृति में इसे हरि और हर के पावन मिलन के रूप में देखा जाता है। उज्‍जैन वह स्‍थान है, जहाँ ज्ञान ने व्‍यक्तित्‍व को आकार दिया, जहाँ गुरु ने शिष्‍य को दिशा दी, जहाँ मित्रता ने आदर्श स्‍थापित किया और जहाँ से योगेश्‍वर श्रीकृष्‍ण की यात्रा ने नई ऊँचाईयों की ओर कदम बढ़ाया। सांदीपनि आश्रम के आसपास ‘सांदीपनि लोक’ विकसित करने की योजना को भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने वाली परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 

इसमें भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा, लगभग 9 थीम आधारित जोन तथा आधुनिक डिजिटल/AR-VR अनुभव जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को केवल दर्शन तक सीमित न रखते हुए श्रीकृष्ण के जीवन, शिक्षा, गुरुकुल परंपरा और भारतीय ज्ञान-विरासत का अनुभवात्मक परिचय देना है। प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को एक व्यापक सांस्कृतिक-तीर्थ पर्यटन श्रृंखला से जोड़ने के लिए ‘श्रीकृष्ण पथ’ विकसित किया जा रहा है। यह पहल मध्यप्रदेश की ‘विरासत से विकास’ की व्यापक सोच के अनुरूप है। सांदीपनि आश्रम पहले से ही उज्जैन के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।

श्री नारायणा धाम, उज्जैन

श्री नारायणा धाम मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के ग्राम नारायणा में स्थित भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह स्थल उज्जैन की उस व्यापक कृष्ण-परंपरा का हिस्सा है, जिसमें सांदीपनि आश्रम को श्रीकृष्ण की विद्यास्थली और नारायणा धाम को श्रीकृष्ण-सुदामा की मैत्री एवं प्रवास की स्मृति से जुड़े स्थल के रूप में देखा जाता है। नारायणा धाम से जुड़ी लोक-परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते समय यहां रात्रि विश्राम किया था। कथा के अनुसार, गुरु माता के निर्देश पर श्रीकृष्ण और सुदामा वन से लकड़ियाँ लेने गए थे। अचानक वर्षा होने के कारण वे वापस आश्रम नहीं लौट सके और एक वृक्ष के नीचे रात्रि बिताई। इसी प्रसंग को नारायणा धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। स्थानीय परंपरा में यहां स्थित वृक्षों को भी इसी प्रसंग की स्मृति से जोड़ा जाता है। नारायणा धाम की विशिष्टता यह है कि यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके बालसखा सुदामा की आराधना की जाती है। इस कारण यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में मित्रता, समानता, स्नेह और मानवीय संबंधों के आदर्श का प्रतीक भी बन गया है। वहाँ स्थित गोमती कुंड, अंकपात क्षेत्र और अन्य स्मृति-स्थल कृष्ण की शिक्षा-परंपरा से जुड़े हैं। नारायणा धाम के विकास को अब केवल स्थानीय मंदिर विकास तक सीमित न रखकर श्रीकृष्ण पाथेय की व्यापक अवधारणा से जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थलों को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए “श्रीकृष्ण पाथेय न्यास” का गठन किया गया है। भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित क्षेत्रों का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण-संवर्धन, मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श तथा श्रीकृष्ण पाथेय के स्थलों का सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है।

अमझेरा, धार

मध्‍यप्रदेश के धार जिले में स्थित अमझेरा में इतिहास, आस्‍था और पौराणिक स्‍मृतियों की अनगिनत परतें समाई हुई हैं। लोक परंपराओं के अनुसार यही वह स्‍थान है, जहाँ भगवान श्रीकृष्‍ण और रुक्मिणी की दिव्‍य कथा का निर्णायक मोड़ आया था। अमझेरा का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र मां अमका-झमका माता का प्राचीन मंदिर है। श्रद्धालुओं का विश्‍वास है कि यही वह स्‍थल है, जहाँ विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने अपने जीवन के सबसे महत्‍वपूर्ण क्षणों में प्रार्थना की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी अत्‍यंत गुणवान, धर्मपरायण और तेजस्विनी थीं। उन्‍होंने भगवान श्रीकृष्‍ण के गुण, पराक्रम और लोककल्‍याणकारी व्‍यक्तित्‍व के बारे में सुना था। उनके मन में श्रीकृष्‍ण के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का भाव उत्‍पन्‍न हो चुका था। वे उन्‍हें मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं। किन्‍तु परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं थी। रुक्मिणी के भाई रुक्‍मी ने उनका विवाह चेदि नरेश शिशुपाल के साथ निश्चित कर दिया था। यह निर्णय रुक्मिणी की इच्‍छा के विपरीत था। जब रुक्मिणी के भाई रुक्‍मी को इस घटना का समाचार मिला, तब वह क्रोधित हो उठा। उसने अपनी सेना के साथ श्रीकृष्‍ण का पीछा किया। अमझेरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित भोपावर क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध में भगवान श्रीकृष्‍ण ने रुक्‍मी को पराजित कर दिया। मध्यप्रदेश सरकार ने अमझेरा को श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख तीर्थ-स्थलों में शामिल करते हुए इसे विकसित करने की विशेष पहल की गई है। अमझेरा को तीर्थ नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह विकास व्यापक “श्रीकृष्ण पाथेय” की अवधारणा के अंतर्गत किया जा रहा है।

जामगढ़ रायसेन

रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम जामगढ़ के निकट विंध्याचल क्षेत्र में स्थित जामवंत गुफा भगवान श्रीकृष्ण, जामवंत और स्यमंतक मणि से जुड़े पौराणिक प्रसंग के कारण विशेष महत्व रखती है। स्यमंतक मणि के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच इसी गुफा में 27 दिनों तक युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान जामवंत को यह अनुभूति हुई कि श्रीकृष्ण ही उनके आराध्य भगवान राम हैं; इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि श्रीकृष्ण को सौंपकर अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे किया। जामगढ़ क्षेत्र का महत्व केवल कृष्ण-परंपरा तक सीमित नहीं है। यहां प्राचीन शिव उपासना से जुड़े स्थल, गुफाएं तथा अन्य पुरातात्विक अवशेष भी पाए जाते हैं और हाल के क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में जामगढ़ के जंगलों में लगभग 800 मीटर लंबी पत्थरों पर पदचिह्नों वाली एक प्राचीन पगडंडी तथा प्रारंभिक नागरी लिपि का शिलालेख मिलने की जानकारी मिली है। मध्यप्रदेश सरकार ने जामगढ़ को भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों की व्यापक विकास अवधारणा ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ में शामिल करने की दिशा में पहल की है। जामगढ़ के संबंध में इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्थल का शोधपरक परीक्षण और दस्तावेजीकरण है।

जुगल किशोर एवं श्री बलदेव जी मंदिर, पन्‍ना

पन्ना को प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के कारण “मंदिरों की नगरी” के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित श्री जुगल किशोर जी मंदिर और श्री बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक एवं स्थापत्य विरासत के दो प्रमुख केंद्र हैं। श्री जुगल किशोर जी मंदिर का निर्माण पन्ना के चौथे बुंदेला शासक राजा हिंदूपत सिंह ने अपने शासनकाल (1758-1778) में कराया था। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित भगवान श्री जुगल किशोर जी की प्रतिमा के संबंध में स्थानीय परंपरा है कि इसे वृंदावन से ओरछा के मार्ग से पन्ना लाया गया था। मंदिर की स्थापत्य शैली में बुंदेला वास्तुकला की विशिष्ट विशेषताएं – नट मंडप, भोग मंडप और प्रदक्षिणा पथ – स्पष्ट दिखाई देती हैं तथा भगवान के आभूषण एवं वस्त्रों में बुंदेलखंडी परंपरा की झलक मिलती है। श्री बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक विरासत के साथ-साथ अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर रोमन वास्तुकला से प्रेरित तथा गॉथिक प्रभाव वाला है। विशाल स्तंभों से युक्त इसका महा-मंडप ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है, जिससे मुख्य द्वार के बाहर से भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यहां भगवान बलदेव जी की आकर्षक प्रतिमा काले शालिग्रामी पत्थर से निर्मित है और यह मंदिर पन्ना की स्थापत्य कला की विशिष्ट उपलब्धियों में गिना जाता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा पन्ना के इन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से महत्व दिया गया है।

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