प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धर्म नगरी उज्जैन में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नीलगंगा आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने मां गंगा की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन और अभिषेक किया। हर साल की परंपरा निभाते हुए मुख्यमंत्री व्यस्त कार्यक्रमों के बीच नीलगंगा सरोवर पहुंचे और गुप्त गंगा के दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष माहौल
नीलगंगा घाट पर धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष माहौल देखने को मिला। संतों के सानिध्य में हुए इस आयोजन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 ऐसा आयोजन होगा, जिसमें पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का वैभव और उज्जैन की आध्यात्मिक गरिमा देखेगी। उन्होंने कहा कि मां शिप्रा के घाटों पर संतों की भावना और परंपराओं के अनुरूप सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम में कई संत मौजूद रहे
कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज, अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज और नारायण गिरि महाराज सहित कई संत मौजूद रहे। संतों ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर उन्हें आशीर्वाद दिया।
4 करोड़ 56 लाख की लागत से विकास और सौंदर्यीकरण के काम जारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नीलगंगा आश्रम स्थित गंगा सरोवर में करीब 4 करोड़ 56 लाख रुपए की लागत से विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य जारी है। सरोवर के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जा रहा है और घाटों को भी नया स्वरूप दिया जा रहा है। संतों ने इन कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।
क्षिप्रा पर बन रहा 29 किलोमीटर लंबा घाट
इस दौरान हरि गिरि महाराज ने कहा कि उज्जैन में कल्पना से परे विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि नासिक कुंभ की बैठक में भी उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सामने उज्जैन में शिप्रा नदी पर बन रहे 29 किलोमीटर लंबे घाटों की चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि यह सब मुख्यमंत्री मोहन यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के वरिष्ठ संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। अंत में संतों ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया, वहीं मुख्यमंत्री ने भी सभी संतों से आशीर्वाद लिया।

