जालौन। जिले के उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब बिजली आपूर्ति की समस्या को लेकर कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी से बातचीत कर रहे ग्रामीणों के साथ उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा कथित मारपीट किए जाने का मामला सामने आया। पीड़ित ग्रामीणों ने घटना की शिकायत जिलाधिकारी जालौन राजेश कुमार पांडेय से करते हुए दोषी गार्डों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बता दे कि कालपी तहसील के महेवा ब्लॉक के ग्राम कुकुहोनू निवासी ओम नारायण, लल्लू राम, संजय, राहुल, दिलीप पाल और सर्वेश अपने गांव में लंबे समय से बनी विद्युत आपूर्ति की समस्या को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। ग्रामीणों ने पहले अपनी समस्या संबंधी प्रार्थना पत्र प्रशासन को सौंपा और इसके बाद कार्यालय परिसर से बाहर निकल आए। इसी दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में कालपी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद चतुर्वेदी मौजूद थे। ग्रामीणों ने मौके का लाभ उठाते हुए उनसे भी क्षेत्र में खराब बिजली व्यवस्था को लेकर बातचीत शुरू कर दी।

ग्रामीणों ने सुरक्षाकर्मियों पर लगाए आरोप

पीड़ितों के अनुसार, बातचीत के दौरान ओम नारायण अपने मोबाइल फोन से पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। ग्रामीणों का दावा है कि विधायक को वीडियो रिकॉर्डिंग से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन उनके साथ मौजूद दो सुरक्षाकर्मी अचानक नाराज हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट शुरू कर दी। शिकायत में एक गार्ड की पहचान अंकित मिश्रा के रूप में की गई है, जबकि दूसरे की पहचान नहीं हो सकी है। आरोप यह भी है कि गार्डों ने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया गया वीडियो जबरन डिलीट करवा दिया।

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दोषी सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि घटना के दौरान विधायक विनोद चतुर्वेदी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने न तो गार्डों को रोकने का प्रयास किया और न ही ग्रामीणों का पक्ष सुना। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी जालौन को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

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आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करेगा

ग्रामीणों ने अपने पत्र में कहा है कि यदि जनप्रतिनिधियों से अपनी समस्याएं बताने पर जनता के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा, तो आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करेगा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कलेक्ट्रेट परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर हुई इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि जनता की आवाज उठाने वालों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की