० आधुनिक सुविधाओं के बावजूद लोकल ट्रेन और बस सेवा बनी बड़ी चुनौती, दिल्ली तक सीधी कनेक्टिविटी नहीं होने का भी असर

जींद। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन लगातार चौथे दिन भी निर्धारित समय के अनुसार जारी रहा। बुधवार सुबह 7:40 बजे ट्रेन जींद रेलवे जंक्शन से रवाना हुई। हालांकि शुरुआती दिनों की तुलना में यात्रियों की संख्या में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन यह बढ़ोतरी अब भी रेलवे की उम्मीदों से काफी कम है।

आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं से लैस इस ट्रेन को अपेक्षित यात्री नहीं मिलने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी वजह जींद-सोनीपत रेलखंड पर पहले से उपलब्ध सस्ती और सुविधाजनक लोकल ट्रेन सेवाएं मानी जा रही हैं।


पैसेंजर ट्रेन बनी चुनौती
इस रूट पर रोहतक पैसेंजर, मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, जींद-दिल्ली मेमू, दिल्ली-पानीपत मेमू, जींद-पानीपत ईएमयू और जींद मेल पैसेंजर जैसी कई ट्रेनें संचालित होती हैं। इन ट्रेनों का किराया महज 30 से 45 रुपये के बीच है, जबकि इनमें से कई ट्रेनें सीधे दिल्ली तक जाती हैं। दूसरी ओर, हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल केवल जींद से सोनीपत के बीच ही चल रही है।

हरियाणा रोडवेज की बसें भी इस रूट पर
रेल मार्ग के अलावा सड़क परिवहन भी हाइड्रोजन ट्रेन के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। इस रूट पर हरियाणा रोडवेज की बसें नियमित रूप से संचालित होती हैं, जिनका किराया करीब 50 रुपये से शुरू होता है। बसों की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि यात्री अपने गंतव्य के नजदीक उतर सकते हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष जींद डिपो से हिसार, कुरुक्षेत्र, रोहतक और सोनीपत के लिए अतिरिक्त बस सेवाएं भी शुरू की गई थीं।

ऐसे में सीमित रूट, दिल्ली तक सीधी सेवा का अभाव और सस्ते विकल्पों की उपलब्धता के कारण देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल यात्रियों को आकर्षित करने में संघर्ष करती नजर आ रही है। अब रेलवे के सामने इस महत्वाकांक्षी परियोजना में यात्रियों की संख्या बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।