प्रदीप मालवीय, उज्जैन। आस्था और डर के बीच झूलती ज़िंदगी जब हर दरवाज़े से निराश होकर लौटती है, तो आखिरकार विश्वास ही आखिरी सहारा बनता है। कुछ ऐसी ही उम्मीद लेकर एक दंपति मां बगलामुखी के दरबार पहुंचा। जहां उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मां से गुहार लगाई। दावा है कि अंतरधार्मिक विवाह के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और अब सिस्टम से भरोसा उठने के बाद उन्होंने आस्था का दरवाज़ा खटखटाया है।
तबस्सुम शेख उर्फ रानी शर्मा और उनके पति भारत शर्मा उज्जैन के मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुरक्षा और शक्ति की कामना की। दंपति का कहना है कि वर्ष 2019 में हुए उनके अंतरधार्मिक प्रेम विवाह के बाद से ही उन्हें कट्टरपंथी विचारधाराओं से जुड़े लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है।
घर की रेकी का आरोप
उनका दावा है कि कई बार उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं और हमले के प्रयास भी किए गए। हालात ऐसे बने कि उन्हें उज्जैन से लेकर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और रतलाम तक कई स्थानों पर रहना पड़ा, लेकिन खतरा लगातार बना रहा। दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर की रेकी की जा रही है, जिसकी शिकायत पुलिस से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सुरक्षा हटाने पर बढ़ी चिंता
वहीं सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब कोर्ट के आदेश पर मिली सुरक्षा को अचानक हटा लिया गया। दंपति का कहना है कि बिना किसी लिखित आदेश के उनका गनमैन वापस बुला लिया गया, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। अब दंपति का कहना है कि जब सिस्टम के हर दरवाज़े से निराशा मिली, तो वे मां बगलामुखी की शरण में पहुंचे हैं और अब उन्हें केवल मां से ही सुरक्षा और शक्ति की उम्मीद है।
2019 में शादी के बाद से लगातार मिल रही धमकियां
रीना शर्मा ने बताया कि हमारी 2019 में शादी हुई थी, उसके बाद से हमें लगातार धमकियां मिल रही है। हमारे घर की रेकी भी की जा रही है। अब हम माताजी की शरण में आए हैं और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग कर रहे है। वहीं पति भारत शर्मा ने कहा कि हमने हर जगह गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट से सुरक्षा मिली थी, वो भी बिना कारण हटा दी गई। अब हमें सिर्फ माता से ही उम्मीद है, अगर हमें कुछ होता है तो बाद में लोग फिल्म बनाएंगे।
आस्था के इस दरबार में जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। वहीं यह दंपति अपनी सुरक्षा की गुहार लेकर आया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला सिर्फ आस्था के भरोसे ही रह जाएगा।

