दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन (Lal Qila Metro Station) के पास लगने वाले भारी जाम और अवैध पार्किंग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग साइट का लाइसेंस रद्द करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल पार्किंग संचालन या ठेकेदार के व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और सुगम आवागमन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुविधा और ट्रैफिक व्यवस्था को किसी निजी ठेकेदार के फायदे-नुकसान के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने माना कि अवैध और अव्यवस्थित पार्किंग की वजह से इलाके में लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही थी, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को यातायात व्यवस्था सुधारने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने इस मामले में MCD द्वारा 13 अगस्त 2025 को जारी नोटिस को सही ठहराया। इस नोटिस में पार्किंग ठेकेदार की मनमानी पर रोक लगाने और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए थे।
दालत ने कहा कि एमसीडी लगातार पार्किंग ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर चेतावनी दे रही थी, क्योंकि इस संबंध में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। एमसीडी ने कोर्ट को यह भी बताया कि पार्किंग ठेकेदार लंबे समय से आरक्षित मासिक लाइसेंस फीस का भुगतान नहीं कर रहा था। अदालत ने माना कि लाल किला और चांदनी चौक बाजार क्षेत्र में भारी भीड़भाड़ को देखते हुए पार्किंग लाइसेंस रद्द करना जरूरी हो गया था।
गेट नंबर 3-4 पर नहीं है पार्किंग
दरअसल, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 21 फरवरी 2025 को एमसीडी को पत्र लिखकर लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 3 और 4 के पास पार्किंग बंद कराने का अनुरोध किया था। ट्रैफिक पुलिस ने कहा था कि यहां पार्किंग और उसके गलत इस्तेमाल की वजह से गंभीर जाम की स्थिति बन रही है। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि मेट्रो स्टेशन के नजदीक अव्यवस्थित पार्किंग की वजह से चांदनी चौक जैसे भीड़भाड़ वाले बाजार में बड़ा हादसा हो सकता है। इसके जवाब में एमसीडी ने ट्रैफिक पुलिस को बताया कि पार्किंग का आधिकारिक ठेका केवल लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 और 2 के लिए दिया गया था, जबकि गेट नंबर 3 और 4 पर गैरकानूनी तरीके से पार्किंग कराकर शुल्क वसूला जा रहा था। ट्रैफिक पुलिस की शिकायत यह भी थी कि पार्किंग निर्धारित सीमा से आगे बढ़ाकर की जा रही थी, जिससे यातायात बाधित हो रहा था।
पार्किंग ठेका 3 साल के लिए था
एमसीडी ने कोर्ट को बताया कि दिसंबर 2024 में तीन साल के लिए पार्किंग का ठेका दिया गया था। हालांकि, लगातार मिल रही शिकायतों और निर्धारित सीमा से अधिक जमीन पर अवैध पार्किंग कराने के आरोपों के बाद अगस्त 2025 में ठेकेदार पर 1,14,115 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। एमसीडी ने यह भी बताया कि ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पार्किंग ठेका रद्द करने, सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की लिखित चेतावनी दी गई थी। इसी चेतावनी को ठेकेदार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि ट्रैफिक पुलिस की शिकायतें गंभीर थीं और लाल किला व चांदनी चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में अवैध पार्किंग सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। कोर्ट ने ठेकेदार की मनमानी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक सुविधा और लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
हाईकोर्ट ने कहा, जब्त करो राशि
दिल्ली हाईकोर्ट ने लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास अवैध पार्किंग और ट्रैफिक जाम को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए पार्किंग साइट का आवंटन रद्द करने के MCD के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि यह मामला आम जनता की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ा है, इसलिए इसे केवल ठेकेदार के फायदे नुकसान के आधार पर नहीं देखा जा सकता। पार्किंग ठेकेदार के रवैये को देखते हुए एमसीडी उसकी सुरक्षा राशि और फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त कर सकती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने से पहले नियमानुसार नया कारण बताओ नोटिस जारी कर उसे सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए।
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