नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित वैश्विक ऊर्जा दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने की अपील का असर अब सरकार के मंत्रियों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को मेट्रो और ई-रिक्शा से यात्रा कर लोगों को संदेश देने की कोशिश की।  आशीष सूद पूर्वी दिल्ली में एक सरकारी स्कूल के दौरे पर पहुंचे, जहां जाने के लिए उन्होंने पहले दिल्ली मेट्रो से सफर किया और बाद में ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन न केवल ईंधन की बचत करता है, बल्कि प्रदूषण कम करने और ट्रैफिक दबाव घटाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने INA मेट्रो स्टेशन से कड़कड़डूमा कोर्ट तक मेट्रो में यात्रा की और बाद में सूरजमल विहार स्थित ‘CM श्री स्कूल’ पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया। जानकारी के अनुसार, मंत्री ने मेट्रो स्टेशन से स्कूल तक जाने के दौरान ट्रैफिक जाम की स्थिति को देखते हुए ई-रिक्शा का सहारा लिया। इस दौरान उन्हें मेट्रो में यात्रियों से बातचीत करते हुए भी देखा गया। आशीष सूद की यह यात्रा सूरजमल विहार स्थित ‘CM श्री स्कूल’ में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम का हिस्सा थी, जहां उन्होंने जोन-1 और जोन-2 के स्कूल प्रमुखों के साथ आयोजित सेशन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था, स्कूल प्रबंधन और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को भाजपा की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का अधिक उपयोग करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि ईंधन बचत केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन बचत और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील की है। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और ईंधन खपत घटाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से शहरों में मेट्रो रेल और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक इस्तेमाल करने का आग्रह किया। उन्होंने कारपूलिंग यानी वाहनों को साझा करने की आदत अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पार्सल और सामान भेजने के लिए सड़क परिवहन के बजाय रेलवे सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कंपनियों और संस्थानों से जरूरत पड़ने पर ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ व्यवस्था को अपनाने पर भी विचार करने की अपील की, ताकि ईंधन की खपत कम हो सके और यातायात का दबाव घटाया जा सके। सरकार का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और साझा यात्रा प्रणाली को अपनाया जाता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।

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