दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए भीषण कार बम धमाका मामले में NIA ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। NIA ने यह चार्जशीट नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में दाखिल की है।इस आतंकी साजिश में कुल 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। बाईट साल 10 नवंबर को हुए इस धमाके ने राजधानी दिल्ली को दहला दिया था और आसपास की संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा था।

आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे आरोपी

चार्जशीट में मुख्य आरोपी पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है, जिसकी इस मामले में मौत हो चुकी है। वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था। जांच एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपी आतंकवादी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े थे, जो अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) का एक सहयोगी संगठन माना जाता है। गृह मंत्रालय ने जून 2018 में AQIS और उससे जुड़े सभी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। गौरतलब है कि, आरोपियों की साजिश लाल किले के पास बड़ा धमाका करने की थी लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा कश्मीर में कई सदस्यों की गिरफ़्तारी के बाद आधी अधूरी तैयारियों के साथ आनन-फानन में छोटा धमाका कर दिया गया। अगर आरोपी अपनी साजिश में कामयाब होते तो इस धमाके में सैकड़ों जानें जा सकती थीं।

देश में शरिया कानून लागू करना था मकसद

चार्जशीट में 588 गवाहियों, 395 से ज्यादा दस्तावेजों और 200 से अधिक जब्त सामग्री को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी AQIS और AGuH की कट्टर जिहादी विचारधारा से प्रभावित थे। NIA ने खुलासा किया कि 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान आरोपियों ने अफगानिस्तान जाने की नाकाम कोशिश के बाद AGuH संगठन को ‘AGuH Interim’ के रूप में दोबारा सक्रिय किया था। इसके बाद उन्होंने ‘ऑपरेशन हेवनली हिंद’ नाम से एक साजिश शुरू की, जिसका मकसद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकना और देश में शरिया कानून लागू करना था।

आरोपियों ने अलग-अलग तरह के IED बनाए

NIA की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नए लोगों की भर्ती की, कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद जमा किए तथा बाजार में आसानी से मिलने वाले रसायनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर विस्फोटक तैयार किए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने अलग-अलग तरह के IED भी बनाए और उनका परीक्षण किया। धमाके में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक TATP था, जिसे आरोपियों ने गुप्त रूप से रसायन जुटाकर तैयार किया था। NIA ने बताया कि दिल्ली पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद एजेंसी ने DNA फिंगरप्रिंटिंग के जरिए डॉ. उमर उन नबी की पहचान की।

आरोपियों ने हमले के लिए जुटाए थे कई हथियार

घटनास्थल और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी सहित जम्मू-कश्मीर के कई ठिकानों से जुटाए गए सबूतों की फोरेंसिक जांच, वॉयस एनालिसिस और वैज्ञानिक परीक्षण किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने AK-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल समेत कई प्रतिबंधित हथियार अवैध तरीके से जुटाए थे। उनके पास जिंदा कारतूस भी मिले। NIA के मुताबिक आरोपी रॉकेट और ड्रोन से लगाए जाने वाले IED पर भी प्रयोग कर रहे थे, ताकि जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सके।

उमर के खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव

NIA ने अदालत से उमर के खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव भी दिया है, क्योकि इस धमाके में उसकी मौत हो गई थी। वहीं अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजामिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं। NIA ने यह चार्जशीट UAPA, BNS और अन्य कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल की है। जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में की गई।

समय रहते आतंकी मॉड्यूल का हुआ था भंडाफोड़

जांच में पता चला कि उनका नेटवर्क देश के दूसरे हिस्सों तक फैलाने की योजना थी, लेकिन समय रहते इस आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। NIA फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी और जांच कर रही है।

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