राजधानी दिल्ली की जर्जर सड़कों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने स्प्रे इंजेक्शन पैचिंग (Spray Injection Patching) तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। मंगलवार से इस तकनीक के जरिए सड़क मरम्मत का काम शुरू हो गया, जिसका निरीक्षण पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि यह आधुनिक तकनीक सड़क मरम्मत को तेज, प्रभावी और अधिक टिकाऊ बनाती है। उन्होंने बताया कि स्प्रे इंजेक्शन पैचिंग के जरिए गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कम समय में की जा सकती है।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि इस तकनीक की खास बात यह है कि किसी भी मौसम में सड़क मरम्मत का कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा मरम्मत के दौरान ट्रैफिक पर भी कम असर पड़ता है, जिससे लोगों को लंबा जाम या अधिक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। स्प्रे इंजेक्शन पैचिंग तकनीक से सड़क पर बने गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत बेहद कम समय में की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस विधि से कई स्थानों पर बने पैच या गड्ढों की रिपेयरिंग कुछ ही मिनटों में संभव है।
मंत्री के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मरम्मत कार्य के दौरान पूरी सड़क पर ट्रैफिक रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। केवल जिस स्थान पर मरम्मत की जा रही होती है, उसी हिस्से में अस्थायी रूप से यातायात रोका जाता है, जबकि सड़क के बाकी हिस्से पर सामान्य रूप से ट्रैफिक चलता रहता है। उन्होंने बताया कि एक गड्ढे की मरम्मत में केवल 2 से 3 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा इस प्रक्रिया में अधिक मैनपावर या मजदूरों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे काम तेजी से पूरा होता है और लोगों को ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं का सामना भी नहीं करना पड़ता।
बारिश में भी तुरंत भरेंगे सड़क के गड्ढे, नई तकनीक से सालभर चलेगा मरम्मत कार्य
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार ने ऐसी व्यवस्था बनाने की योजना तैयार की है, जिसके तहत बारिश, गर्मी और सर्दी हर मौसम में सड़कों की मरम्मत का काम जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि यदि बारिश के दौरान किसी सड़क पर गड्ढा बन जाता है या सड़क का कोई हिस्सा उखड़ जाता है, तो स्प्रे इंजेक्शन पैचिंग तकनीक की मदद से उसी समय उसकी मरम्मत की जा सकेगी। इससे खराब सड़कों की वजह से लोगों को लंबे समय तक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मंत्री के अनुसार, इस तकनीक में सबसे पहले हाई-स्पीड हवा से गड्ढे या क्षतिग्रस्त हिस्से में जमी धूल और मिट्टी को पूरी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद बिटुमेन इमल्शन की एक बॉन्डिंग परत लगाई जाती है, जिससे नई सामग्री सड़क से मजबूती से चिपक सके। अंत में इमल्शन-लेपित पत्थरों को हाई प्रेशर के जरिए गड्ढे में भरा जाता है, जिससे मरम्मत तेजी से और टिकाऊ तरीके से पूरी हो जाती है।
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