हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के निजी अस्पताल बॉम्बे हॉस्पिटल में काम करने वाली नर्सों के साथ कथित तौर पर बड़ा अन्याय सामने आया है। नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा 2026 में शामिल होने जा रही नर्सों को अस्पताल प्रबंधन ने एग्जाम देने से रोक दिया है। अस्पताल की करीब 30 से 35 नर्सों ने इस सरकारी भर्ती परीक्षा के लिए फॉर्म भरे हैं, जिनकी परीक्षा 15 मई को होना है। कई नर्सों के परीक्षा केंद्र भोपाल समेत दूसरे शहरों में आए हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन छुट्टी देने से साफ इनकार करता नजर आ रहा है।
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जानकारी के मुताबिक अस्पताल की नर्स सुपरिटेंडेंट सीबी जॉर्ज ने अनाउंसमेंट कर नर्सों को चेतावनी दी। ऑडियो में कथित तौर पर कहा गया कि “15 तारीख को हॉस्पिटल से एग्जाम लिखने जो बच्चा जाएगा, वह अपनी खुद की जिम्मेदारी पर जाएगा। मेरे यहां कोई भी चेंज नहीं आना चाहिए। किसी से एग्जिट किया हो तो भी छुट्टी नहीं दे पाऊंगी। जॉइनिंग के समय हमने कभी नहीं लिखा कि एग्जाम के लिए छुट्टी देंगे। 15 तारीख का कोई एडजस्टमेंट नहीं करेंगे। अगर कोई एडजस्टमेंट देना भी चाहते हैं तो नहीं दे सकते।”इतना ही नहीं, हॉस्टल में रहने वाली स्टाफ नर्सों को भी एक सख्त मैसेज भेजा गया। मैसेज में लिखा गया कि 14 और 15 मई को किसी भी स्टाफ को नाइट पास नहीं दिया जाएगा। ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और संबंधित स्टाफ को हॉस्टल खाली करना पड़ेगा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अस्पताल में काम करने वाली कई नर्सें डरी और परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर वे सरकारी नौकरी की परीक्षा देने जाती हैं तो निजी अस्पताल की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
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कई छात्राओं के सामने अब भविष्य और रोजगार को लेकर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि अभी तक किसी नर्स ने खुलकर शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन नाम न बताने की शर्त पर कुछ नर्सों ने मैसेज और सुपरिटेंडेंट की ऑडियो क्लिप laluram.com तक पहुंचाई है। मामला सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या निजी अस्पताल कर्मचारियों को सरकारी भर्ती परीक्षा देने से रोक सकते हैं? और क्या कर्मचारियों पर इस तरह नौकरी और हॉस्टल खाली कराने का दबाव बनाना उचित है? अब सबकी नजर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी है कि इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
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