अनमोल मिश्रा, सतना। रीवा जिले की सेमरिया तहसील अंतर्गत ग्राम लटियार में जन्मीं और पली-बढ़ीं डॉ. अर्चना शुक्ला ने अपनी उपलब्धियों से पूरे मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्हें वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा से लटियार गांव सहित रीवा और भोपाल में खुशी का माहौल है।
डॉ. अर्चना शुक्ला के पिता डॉ. मिथिलेश प्रसाद मिश्र आर्मी मेडिकल कोर में धर्मशिक्षक रहे हैं। डॉ. अर्चना की प्रारंभिक शिक्षा गांव लटियार के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की। पुणे विश्वविद्यालय से बीएससी एवं एमएससी करने के बाद उन्होंने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से पक्षीविज्ञान (Ornithology) में शोध किया।
अध्यापन के साथ नवाचार को बनाया मिशन
वर्ष 2010 में शासकीय विज्ञान शिक्षिका के रूप में करियर की शुरुआत करने वाली डॉ. अर्चना की पहली पदस्थापना सतना जिले के करहीकलां में हुई। वर्ष 2014 में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वेंकट क्रमांक-1, सतना में पदस्थापना के बाद उन्होंने अध्यापन के साथ विद्यार्थियों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ने के लिए कई अभिनव पहल शुरू कीं। उन्होंने सतना के विभिन्न पार्कों में करीब 5 हजार पौधों पर क्यूआर कोड लगाए, जिनके माध्यम से लोग पौधों के वानस्पतिक नाम और उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, गौरैया संरक्षण को लेकर पांच वर्षों तक शोध करने के बाद उन्होंने गौरैया के लिए विशेष घोंसले तैयार किए।
साल 2022 में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भेल, भोपाल में पदस्थ होने के बाद भी उनका पर्यावरण संरक्षण अभियान जारी रहा। मध्यप्रदेश टाइगर सोसाइटी भोपाल के साथ मिलकर उन्होंने गौरैया संरक्षण के अभियान को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया। उनके कार्य की सराहना तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से की थी।

जापान तक पहुंचा ‘प्लांट इमोशन’ प्रोजेक्ट
डॉ. अर्चना शुक्ला के नवाचारों में ‘प्लांट इमोशन’ परियोजना भी खास रही। कक्षा में पढ़ाते समय जब उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पेड़ हमारी भावनाओं को समझ सकते हैं, तो बच्चों ने इसे प्रयोग के माध्यम से जांचने की इच्छा जताई। इसके बाद विद्यार्थियों के साथ मिलकर इस परियोजना पर काम शुरू किया गया। परियोजना में पौधों से बातचीत और उनकी वृद्धि में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया। इस अनोखे प्रोजेक्ट को उनके एक विद्यार्थी ने जापान में भी प्रस्तुत किया। इसके अलावा विद्यार्थियों ने रोजमर्रा की समस्या का समाधान तलाशते हुए प्रमाण पत्र और तस्वीरों को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड-सुरक्षित क्यूआर कोड भी तैयार किया। डॉ. शुक्ला के अनुसार, इस परियोजना को नेपाल में 42 देशों के वैज्ञानिकों के सामने भी प्रस्तुत किया गया।

कई प्रतिष्ठित सम्मान से हो चुकी हैं सम्मानित
डॉ. अर्चना शुक्ला को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार 2020, मध्यप्रदेश वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार 2021, सतना गौरव सम्मान 2024 और राष्ट्रीय नेक्सस अवार्ड 2025 प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्हें विंध्य गौरव सम्मान एवं मध्यप्रदेश महिला पर्यावरण योद्धा सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयन की सूचना मिलते ही लटियार गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, ग्रामीणों तथा विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और स्वयंसेवी संगठनों ने डॉ. अर्चना शुक्ला को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

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