भिवानी। हरियाणा महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार वीरवार को भिवानी के नागरिक अस्पताल का अचानक निरीक्षण करने पहुंची। जब वे अधिकारियों के साथ अस्पताल के वार्ड नंबर 3 का जायजा ले रही थीं और मरीजों से उनका हालचाल जान रही थीं, तभी वहां भर्ती एक घायल युवती रोने लगी। युवती ने रोते हुए शिकायत की कि अस्पताल में उसकी ठीक से देखभाल नहीं की जा रही है। इस पर मीना परमार ने तुरंत डॉक्टरों को निर्देश दिए कि बच्ची का पूरा ख्याल रखा जाए और इलाज में कोई कमी न छोड़ी जाए।
सड़क हादसे के बाद अस्पताल में है भर्ती
अस्पताल में भर्ती भिवानी के जीतू वाला जोहड़ इलाके की रहने वाली माही ने बताया कि 25 जून को उसकी स्कूटी और एक कार के बीच टक्कर हो गई थी। इस एक्सीडेंट में उसे काफी गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तभी से उसका इलाज चल रहा है। जब महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार उसके बेड के पास पहुंचीं, तो वह अपनी आपबीती बताते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाई। हालांकि मीना परमार ने उसे ढांढस बंधाया और चुप कराने की कोशिश की।
डॉक्टरों के व्यवहार से परेशान दिखी मरीज
घायल माही ने आरोप लगाया कि एक्सीडेंट के बाद से वह अस्पताल में भर्ती है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा उसका इलाज और देखभाल सही तरीके से नहीं की जा रही है। इसके साथ ही अस्पताल के स्टाफ का व्यवहार भी उसके प्रति ठीक नहीं है, जिसकी वजह से उसे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इस शिकायत पर मीना परमार ने मौके पर मौजूद पीएमओ यानी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बलवान सिंह और अन्य स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि इस बच्ची का इलाज अच्छे से होना चाहिए। डॉक्टरों को चेतावनी दी कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह आपकी जिम्मेदारी भी है और इंसानियत के नाते भी आपको मरीजों का ध्यान रखना चाहिए।
जेल का भी किया दौरा, महिलाओं को सिखाएंगे हुनर
महिला आयोग की उपाध्यक्ष मीना परमार ने बताया कि उन्होंने जिला जेल और जिला नागरिक अस्पताल दोनों का निरीक्षण किया है। जेल के दौरे के दौरान उन्होंने वहां बंद महिला कैदियों से मुलाकात की और उनकी बैरकों की साफ-सफाई की जांच की। उन्होंने महिलाओं को मिलने वाले भोजन की क्वालिटी और उनकी व्यक्तिगत स्वच्छता का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि जेल के निरीक्षण में जो भी कमियां मिली हैं, उन्हें सुधारने के लिए सरकार को एक रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके साथ ही जेल में महिला कैदियों को हुनर सिखाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और मानसिक काउंसिलिंग यानी सही मार्गदर्शन देने का काम किया जाएगा ताकि जेल से छूटने के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
मरीजों ने दर्ज कराईं कई शिकायतें
मीना परमार ने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और अन्य विभागों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान कई अन्य मरीजों ने भी अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। कुछ मरीजों ने शिकायत की कि इमरजेंसी विभाग के डॉक्टर सही तरीके से इलाज नहीं करते हैं और उनका बात करने का तरीका भी अच्छा नहीं है। इन शिकायतों पर महिला आयोग ने सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। उपाध्यक्ष ने हर वार्ड में जाकर मरीजों से पूछा कि उन्हें मिलने वाले इलाज में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है।
महिलाओं को दी जाएगी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि आयोग द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत लड़कियों और महिलाओं को आत्मरक्षा यानी खुद की सुरक्षा करने के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाए जाएंगे। इसके अलावा गांवों की महिला सरपंचों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के प्रयास किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर महिला सरपंचों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें उन्हें सिखाया जाएगा कि वे सरकारी अधिकारियों से कैसे बात करें और अपने गांव के विकास कार्यों को बिना किसी दबाव के कैसे पूरा कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि जेल में महिला कैदियों ने जो अपनी कानूनी और व्यक्तिगत समस्याएं बताई हैं, आयोग उन्हें सुलझाने का पूरा प्रयास करेगा।
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