अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप बेहद तेजी से फैल रहा है. कांगो में मई से ही इबोला के एक दुर्लभ प्रकार का प्रकोप फैला हुआ है, जिसका कोई स्वीकृत इलाज या टीका अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है. सरकार द्वारा मंगलवार रात को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है कि इबोला के कुल 2,011 मामलों की पुष्टि हुई है और इनमें से 754 संक्रमितों की मौत हो चुकी है.

यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है, जिसने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को कहा कि पूर्वी कांगो में इबोला के 80 प्रतिशत नए मामले अज्ञात संचरण श्रृंखलाओं से उभर रहे हैं.
अफ्रीका में इबोला वायरल अपने पांव पसारता जा रहा है. खासतौर पर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस वायरस ने अब तक 2011 लोगों को संक्रमित कर दिया है, जबकि इससे मरने वालों की संख्या 754 हो चुकी है. वहीं, अब तक 366 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं.

संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम अभी भी चुनौती बना हुआ है और फिलहाल केवल 67 फीसदी संपर्कों की ही पहचान हो पाई है.
देश के पांच प्रांतों में इटुरी, नॉर्थ किवू, साउथ किवू, हाउत-उएले और शोपो प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. फिलहाल 763 मरीज अस्पतालों या आइसोलेशन केंद्रों में इलाज करा रहे हैं. जबकि 95 फीसदी बेड भी भर चुके है. अफ्रीका रोग नियंत्रण केंद्र का कहना है कि यह महाद्वीप में इबोला का सबसे तेजी से फैलने वाला प्रकोप है.
दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस प्रकोप के पहले संक्रमित व्यक्ति यानी ‘पेशेंट जीरो’ की पहचान नहीं हो सकी है.
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