लखनऊ में हुई कार्यशाला में 33 जिलों के अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को ईवीएम-वीवीपैट की जांच समेत चुनावी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया. आयोग ने मशीनों की आवाजाही में अनुमति, निर्धारित मार्ग और जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य बताया है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग को लेकर अधिकारियों को निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश दिए हैं. सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को ईवीएम-वीवीपैट की तकनीकी जांच के साथ प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई.
एफएलसी पर विशेष जोर
डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में हुई कार्यशाला में वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने एफएलसी को चुनावी तैयारियों का शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण बताया. उन्होंने निर्देश दिया कि एफएलसी पूरी होने के बाद सही पाई गई मशीनों की सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाए और उनकी विधिवत स्वीकृति ली जाए.
उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और इसके लिए हर दिन निर्धारित समय रखने को कहा. साथ ही एफएलसी की प्रक्रिया, राजनीतिक दलों की भागीदारी और लागू प्रोटोकॉल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए.
मनीष गर्ग ने अधिकारियों से प्रशिक्षण में व्यक्तिगत रूप से सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की. उन्होंने एसआईआर के दौरान प्राप्त आवेदनों और प्रपत्रों के लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा कर समयसीमा के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए.
मशीनों की आवाजाही पर नियम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि चुनाव से जुड़ी हर प्रक्रिया पारदर्शिता, सतर्कता और समयबद्धता के साथ पूरी की जानी चाहिए. उन्होंने राजनीतिक दलों को एफएलसी की तारीखों की पहले से जानकारी देने और सभी अभिलेखों को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया.
उन्होंने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी ईवीएम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जाया जाएगा. मशीनों के परिवहन के दौरान जीपीएस ट्रैकिंग और तय किए गए मार्ग का पालन अनिवार्य रहेगा.
ईवीएम प्रक्रिया का प्रशिक्षण
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने अधिकारियों को ईवीएम के संचालन से लेकर रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग, मतदान, मतगणना और मतगणना के बाद की प्रक्रियाओं तक का प्रशिक्षण दिया. विशेषज्ञ इंजीनियरों ने मशीनों की तकनीकी संरचना और सुरक्षा विशेषताओं की जानकारी भी दी.
एफएलसी के दौरान सामने आने वाली सामान्य तकनीकी त्रुटियों से बचने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करने के तरीकों पर भी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया.
पहले भी हुई कार्यशालाएं
उत्तर प्रदेश में एफएलसी को लेकर इससे पहले भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं. 19 अगस्त को गौतमबुद्धनगर और 11 सितंबर को वाराणसी में 21-21 जिलों के अधिकारियों के लिए एफएलसी कार्यशाला हुई थी.
लखनऊ की कार्यशाला में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह और उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.



