हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस अब खुद सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है। लसुड़िया थाना क्षेत्र में वारंट तामील करने पहुंची पुलिस टीम पर लगे आरोपों के बाद पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कार्रवाई बिना किसी जांच के की गई, जिसने पूरे पुलिस महकमे में असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। मामला स्कीम नंबर 114 का है, जहां पुलिस टीम एक वारंटी आरोपी गौरव जैन को पकड़ने पहुंची थी।
शिकायत घटना के 15 दिन बाद सामने आई
आरोपी के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। चेक बाउंस, जुआ एक्ट और मारपीट जैसे करीब 8 प्रकरण। पुलिस के मुताबिक, आरोपी घर के अंदर छिपा हुआ था। ऐसे में पुलिस ने कानूनी प्रावधानों के तहत दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश किया और उसे गिरफ्तार कर लिया लेकिन यहीं से कहानी ने मोड़ लिया। कार्रवाई के 15 दिनों बाद आरोप लगाए गए कि पुलिसकर्मियों ने घर में घुसकर बदसलूकी की, सोना लूट लिया और ऑनलाइन रिश्वत ली। चौंकाने वाली बात यह रही कि ये शिकायत घटना के पूरे 15 दिन बाद सामने आई। इस दौरान सोशल मीडिया पर कुछ एडिटेड वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें पुलिस की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
सीसीटीवी फुटेज ने आरोपों की दिशा बदल दी
फुटेज में साफ देखा गया कि पुलिसकर्मी सीमित दायरे में ही रहे, वे बेडरूम में नहीं घुसे और न ही किसी तरह की तोड़फोड़ करते नजर आए। इससे यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस के खिलाफ झूठा माहौल तैयार किया गया? क्या सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया? अगर अपराधी घर में छिपा है तो कानूनी तौर पर दरवाजा तोड़कर निकाला जा सकता है। कानून की बात करें तो Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 44 पुलिस को यह अधिकार देती है कि यदि कोई आरोपी किसी घर में छिपा हो और दरवाजा न खोले, तो पुलिस आवश्यक होने पर जबरन प्रवेश कर सकती है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई प्रथम दृष्टया कानून के दायरे में नजर आती है।
लाखों रुपए का सोना कहां से आया
जिस व्यक्ति पर लाखों रुपए के चेक बाउंसिंग के मामले चल रहे हैं, वह घर में लाखों का सोना कैसे रख सकता है? इस पूरे मामले में गौरव जैन का रिकॉर्ड देखें तो उसमें चार मामले चेक बाउंसिंग के कोर्ट में लंबित हैं, जिनके वारंट भी जारी हो चुके हैं। ऐसे में पुलिस पर आरोप लगाने वाले गौरव जैन की पत्नी के पास लाखों रुपए का सोना कहां से आया, यह भी सवाल खड़ा करता है। निवेश के नाम पर पैसा हजम करने वाले गौरव जैन ने क्या घर में सोना खरीदकर रखा हुआ था?
पुलिस का मानवीय चेहरा आया सामने
इस पूरे घटनाक्रम का एक मानवीय पहलू भी सामने आया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी की छोटी बच्ची को पुलिसकर्मी संभालते नजर आए। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि बच्ची को डर न लगे और स्थिति को संवेदनशील तरीके से संभाला जाए। यह तस्वीर पुलिस के उस चेहरे को दिखाती है, जिसे अक्सर ऐसे विवादों में भुला दिया जाता है। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर खड़ा होता है। बिना विस्तृत जांच के पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। क्या यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया? क्या इससे पुलिसकर्मियों के मन में यह संदेश जा रहा है कि कार्रवाई करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा?
पुलिस की कार्यप्रणाली पर असर
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से अन्य थानों के पुलिसकर्मियों में भी असंतोष है। उनका कहना है कि एक तरफ उन्हें वारंटी अपराधियों को पकड़ने के सख्त निर्देश दिए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्रवाई करने पर बिना जांच सस्पेंड कर दिया जाता है। ऐसे माहौल में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ सकता है।
सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
मामले में डीसीपी कुमार प्रतीक का कहना है कि जांच जारी है और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर होगी। लेकिन जब शुरुआती साक्ष्य, खासकर सीसीटीवी फुटेज, पुलिस के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, तब यह सवाल और भी बड़ा हो जाता है कि क्या सस्पेंड पुलिसकर्मियों को न्याय मिलेगा? इंदौर में यह मामला अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, प्रशासनिक निर्णय और सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।

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