चंकी बाजपेयी, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले एक शातिर और रसूखदार ‘मास्टरमाइंड’ की गिरफ्तारी हुई है। साल 2025 से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरारी काट रहे नकली क्राइम ब्रांच अधिकारी नितिन मोदी को आखिरकार असली क्राइम ब्रांच ने दबोच लिया है। इस शातिर गिरोह ने न सिर्फ फिल्मी स्टाइल में बाप-बेटे का अपहरण किया था, बल्कि डरा-धमकाकर लाखों रुपए के डिजिटल डॉलर (USDT) भी ट्रांसफर करवा लिए थे।
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खुद को बताया क्राइम ब्रांच और कर लिया किडनैप
यह खौफनाक मामला तब शुरू हुआ था जब द्वारकापुरी निवासी फरियादी स्नेहा परमार के घर पर कुछ लोग पहुंचे। उन्होंने खुद को इंदौर क्राइम ब्रांच का आला अधिकारी बताया। इससे पहले कि पीड़ित कुछ समझ पाते आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। डरे-सहमे फरियादी और उसके पिता को बदमाश जबरन एक गाड़ी में डालकर लसूडिया क्षेत्र की तरफ ले गए।
फ्रॉड का आरोप लगाकर लूटे 5773 डिजिटल डॉलर
रास्ते भर बदमाशों ने फरियादी पर अवैध रूप से फ्रॉड का काम करने का धौंस जमाया और जेल भेजने की धमकी दी। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक बदमाशों ने बंदूक और रसूख की नोक पर स्नेहा के मोबाइल से 5,773 USDT (डिजिटल डॉलर) अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए। भारतीय मुद्रा में इस डिजिटल करेंसी की कुल कीमत 5 लाख 12 हजार रुपए थी। इसके बाद बदमाशों ने उनका मोबाइल भी लूट लिया और मोटी रकम की मांग करते हुए उन्हें छोड़ दिया।
नितिन मोदी था आखिरी कड़ी, 3 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
जब पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर असली क्राइम ब्रांच में इस पूरी आपबीती की शिकायत दर्ज कराई तब पुलिस के भी होश उड़ गए। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए पूर्व में तीन आरोपियों- नीरज तिवारी, अमन लखिया और दीपक तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन वारदात का मुख्य किरदार नितिन मोदी साल 2025 से लगातार फरार चल रहा था, जिसे अब पुलिस ने घेराबंदी कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
आरोपियों को पता था पीड़ित का ‘सीक्रेट बिजनेस’
पुलिस पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल आरोपी नितिन मोदी और उसके साथी भी USDT के लेन-देन के काम से जुड़े हुए थे। उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि फरियादी स्नेहा डिजिटल डॉलर का बड़ा काम करता है और उसके पास लाखों रुपए की डिजिटल करेंसी मौजूद है।
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इसी ‘सीक्रेट इंफॉर्मेशन’ के दम पर उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से नकली पुलिस बनकर इस बड़ी किडनैपिंग और डिजिटल डकैती को अंजाम दिया था। फिलहाल पुलिस नितिन मोदी से रिमांड पर पूछताछ कर रही है कि उसने अब तक और कितने लोगों को नकली अधिकारी बनकर अपना शिकार बनाया है।

