संजय वाणी, आलीराजपुर। वैसे तो अभी मानसून को आने में समय है और खरीफ सीजन भी शुरू नहीं हुआ है लेकिन खाद की किल्लत ने अन्नदाता को बेहाल कर दिया है। सरकारी खाद वितरण व्यवस्था सर्वर फेल होने से पूरी तरह चरमरा गई है। आलम यह है कि कहीं टोकन नहीं मिल रहा तो कईं मशीने ही ठप्प पड़ी हुई है। जिससे किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी बिना खाद लिए वापस लौटने को मजबूर है।

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कालाबाजारी का खेल शुरू

सरकारी व्यवस्था के ठप्प होते ही कालाबाजारी का खेल शुरू हो गया है। किसानों का कहना है कि जो खाद सरकारी केंद्रों पर तय कीमत में मिलनी चाहिए, वह बाजारों में दोगुने दामों में बेची जा रही है। एक यूरिया की बोरी 280 रूपए में मिलनी चाहिए लेकिन यह 400 से 500 रूपए तक बाजारों में उपलब्ध है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।

सुबह से शाम तक खाद केंद्रों के चक्कर काट रहे किसान

खाद खरीदने के लिए किसान सुबह से शाम तक खाद केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन केंद्रों में किसानों को खाद की जगह सर्वर डाउन का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। इतने चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिलने से किसानों में भारी चिंता है।

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सर्वर व्यवस्था दुरुस्त करें प्रशासन- किसान

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सर्वर व्यवस्था दुरुस्त किया जाए और खाद वितरण सुचारु किया जाए। उन्होंने सरकारी से अपील की है कि कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें जिससे किसानों को राहत मिल सके।

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