काजल, हिसार. हरियाणा के किसानों की आमदनी बढ़ाने और बंजर जमीन का सही इस्तेमाल करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और चेन्नई के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रैकिशवॉटर एक्वाकल्चर यानी सीआईबीए के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन यानी मछली पालन के क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा देना और किसानों को विशेष प्रशिक्षण देना है। इस समझौते पर दोनों संस्थानों के बड़े अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए हैं।

खारे पानी और जलभराव वाले क्षेत्रों में आएगी खुशहाली

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज काम्बोज ने बताया कि हरियाणा के कई इलाकों में जमीन के नीचे खारा पानी होने और जलभराव की वजह से पारंपरिक खेती करना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी जमीनों से किसानों को कोई फायदा नहीं मिल पाता। अब इस समझौते के बाद वैज्ञानिक प्रयासों से इस कम उपजाऊ और बंजर भूमि का उपयोग मछली पालन के लिए किया जाएगा। इससे बंजर पड़ी जमीन से भी किसान अच्छी कमाई कर सकेंगे और गांव के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

मछली पालन से दूर होगा फसलों का जोखिम

कुलपति ने आगे बताया कि प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की देखरेख में पानी की जांच करके सही प्रजाति की मछलियों का चुनाव किया जाएगा। मछली पालन अपनाने से किसानों को अतिरिक्त कमाई तो होगी ही, साथ ही फसल खराब होने का जोखिम भी कम हो जाएगा। इससे बाजार और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।

चेन्नई का संस्थान देगा तकनीकी मदद

चेन्नई के इस प्रमुख संस्थान के निदेशक डॉक्टर कुलदीप लाल ने कहा कि उनका संस्थान खारे पानी में जलीय कृषि के क्षेत्र में देश का सबसे अग्रणी केंद्र है। वे अपनी इस आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का पूरा फायदा हरियाणा के किसानों तक पहुंचाएंगे। इससे उन इलाकों में भी व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन शुरू हो सकेगा जहां पानी में लवणता यानी नमक की मात्रा ज्यादा है। यह साझा प्रयास हरियाणा में खेती और मत्स्य पालन के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस खास मौके पर दोनों संस्थानों के कई वरिष्ठ प्रोफेसर और प्रतिनिधि मौजूद रहे।