Business Desk – Flight Ticket Price Hike Alert : ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म मैकिंजी की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में हवाई यात्रा 25% तक महंगी हो सकती है. इसकी बड़ी वजह जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सप्लाई पर बढ़ता दबाव है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव, रिफाइनरी उत्पादन में कमी और ईंधन निर्यात पर लगी रोक के कारण एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिसका असर यात्रियों पर पड़ सकता है.

टिकट की कीमत में 30% हिस्सा फ्यूल का
रिपोर्ट के अनुसार किसी भी हवाई टिकट की कुल कीमत में करीब 30% हिस्सा केवल फ्यूल कॉस्ट का होता है. ऐसे में जेट फ्यूल महंगा होने पर एयरलाइंस के लिए किराया बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है.
जेट फ्यूल का ‘क्रैक स्प्रेड’ दोगुने से ज्यादा बढ़ सकता है
कच्चे तेल और उससे बनने वाले ईंधन उत्पादों की कीमत के अंतर को क्रैक स्प्रेड कहा जाता है. यह आमतौर पर 20 डॉलर प्रति बैरल या उससे कम रहता है. मैकिंजी का अनुमान है कि 2026 में यह बढ़कर 50 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो सकता है, जिससे एयरलाइंस की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी.
खाड़ी और एशियाई देशों से सप्लाई घटी
दुनिया के करीब 40% जेट फ्यूल की सप्लाई खाड़ी और एशियाई देशों से होती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत, चीन और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने रणनीतिक भंडार सुरक्षित रखने के लिए ईंधन निर्यात पर आंशिक रोक लगाई है. इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतों पर दबाव बढ़ा है.
रिफाइनरियां पहले से पूरी क्षमता पर
मैकिंजी के अनुसार दुनिया की कई बड़ी रिफाइनरियां पहले से ही लगभग पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं. ऐसे में उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है. फिलहाल बाजार में मांग पूरी करने के लिए पुराने स्टॉक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
कच्चे तेल में गिरावट से मिली थोड़ी राहत
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 75.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो ईरान युद्ध के दौरान पहुंचे 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से लगभग 37% कम है. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने से कीमतों में नरमी आई है.
अभी उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका
मैकिंजी का कहना है कि जब तक देश अपने रणनीतिक तेल भंडार दोबारा नहीं भर लेते और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जेट फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसका असर आने वाले महीनों में हवाई किराए पर भी देखने को मिल सकता है.

