जुबैर अंसारी/सुपौल। बिहार में रोशन प्रजापति की मृत्यु का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को सुपौल में बिहार प्रजापति समन्वय समिति के बैनर तले समाज के सैंकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। रोशन प्रजापति को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आयोजित यह आक्रोश मार्च देखते ही देखते सरकार और प्रशासन के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठी न्याय की मांग
प्रदर्शन की शुरुआत स्थानीय स्तर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हुई। इसमें बिहार प्रजापति समन्वय समिति के शीर्ष पदाधिकारियों ने घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। समिति के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश प्रजापति, संयोजक डॉ. शैलेन्द्र कुमार और महामंत्री मिंटू प्रजापति (उर्फ गुरु जी) ने स्पष्ट किया कि रोशन प्रजापति की मौत केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए न्याय का प्रश्न है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग को प्रमुखता से रखा।
शांतिपूर्ण मार्च और लाठीचार्ज का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया, जिसमें राज्य भर से आए अतिपिछड़ा समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से समाहरणालय की ओर बढ़ रहे थे। इसी बीच, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उन पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया।
दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन के इस रवैये से नाराज लोगों ने समाहरणालय के समक्ष जमकर नारेबाजी की। विश्वकर्मा महासभा के सचिव डॉ. संजीव पासवान समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार न्याय का वादा करती है, वहीं दूसरी तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि रोशन प्रजापति के दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो यह आंदोलन राज्य स्तर पर व्यापक रूप ले लेगा।
इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि रोशन प्रजापति का परिवार अकेला नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दबाव के बाद क्या कदम उठाता है और न्याय की मांग कब तक पूरी होती है।

