पटना। जिले के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है। थर्ड जेंडर उम्मीदवार प्रिया राज प्रियांशु (प्रिया सिन्हा) ने अपना नामांकन रद्द किए जाने के बाद जिला प्रशासन पर गंभीर साजिश के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र में भेदभाव और राजनीतिक मिलीभगत का परिणाम बताया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रिया सिन्हा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव के लिए पूरी निष्ठा और तैयारी के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके अनुसार उनके सभी दस्तावेज और प्रस्तावक नियमानुसार सही थे। हालांकि बाद में उनके नामांकन को तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया गया।
प्रशासन पर साजिश का आरोप
प्रियांशु ने आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करने का आधार मात्र एक स्थान पर हस्ताक्षर का छूट जाना बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि नामांकन दाखिल करते समय संबंधित पदाधिकारी ने उन्हें इस चूक के बारे में क्यों नहीं बताया?
प्रिया का तर्क है मेरी जिम्मेदारी तो है ही लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों की भी जवाबदेही है कि वे नामांकन के समय फॉर्म की कमियां बताएं। केवल एक हस्ताक्षर के नाम पर पूरे नामांकन को खारिज कर देना किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि क्या वाकई उनके हस्ताक्षर छूटे थे या कागजों में हेरफेर की गई।
वर्ग विशेष के खिलाफ अभियान
प्रिया ने यह भी दावा किया कि इस उपचुनाव में एक सोची-समझी रणनीति के तहत विशेष समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य रूप से कायस्थ और वैश्य समाज के उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कराए गए हैं ताकि बीजेपी अपनी चुनावी मंशा को पूरा कर सके।
भेदभाव के खिलाफ न्याय की जंग
थर्ड जेंडर समुदाय से आने के कारण अपने साथ भेदभाव होने का आरोप लगाते हुए प्रिया ने कहा मैं इस चुनाव में धर्मनिरपेक्षता और समाज सेवा का एजेंडा लेकर उतरी थी जो कुछ पार्टियों को रास नहीं आया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी और न्याय के लिए हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगी।
यह घटना न केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है बल्कि मुख्यधारा की राजनीति में हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करती है।

