अजय सैनी, भिवानी। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों की 60 किलोग्राम पुरुष मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले हरियाणा के भिवानी जिले के गांव मिताथल के मुक्केबाज सचिन सिवाच का गांव पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सचिन ने कहा कि गांव में सुविधाओं का अभाव रहा, लेकिन कोच और माता-पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। उन्होंने सीमित संसाधनों में अभ्यास जारी रखा और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

मिट्टी पर बने सर्कल को ही मान लिया बॉक्सिंग रिंग

सचिन के करीबियों के मुताबिक, गांव में बॉक्सिंग के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। कोच टेकराम ने अपने पैर से सर्कल खींचकर उसे ही रिंग का रूप दिया और सचिन ने उसी में अभ्यास शुरू किया। गांव के स्टेडियम में भी बॉक्सिंग की पर्याप्त सुविधा नहीं है। सचिन के करीबी अशोक सिवाच ने कहा कि अगर गांव में बेहतर सुविधाएं और बॉक्सिंग रिंग उपलब्ध होती तो यहां से और भी अच्छे खिलाड़ी आगे आ सकते हैं।

गांव पहुंचने पर हुआ गर्मजोशी से स्वागत

स्वर्ण पदक जीतने के बाद सचिन के पैतृक गांव मिताथल पहुंचने पर ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सम्मान मिलने पर सचिन ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह स्वर्ण पदक पूरे देश, हरियाणा और उनके गांव के लोगों को समर्पित है। परिवार, कोच और देशवासियों के समर्थन से ही यह उपलब्धि हासिल हो सकी।

अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर नजर

सचिन ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतना है। राष्ट्रमंडल खेलों के बाद अब वह एशियन गेम्स और ओलंपिक की तैयारी पटियाला में करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार जो तकनीकी कमियां सामने आई हैं, उन्हें भविष्य में दोहराया नहीं जाए, इसके लिए वह कड़ा अभ्यास करेंगे। सचिन सिवाच ने राष्ट्रमंडल खेलों की 60 किलोग्राम मुक्केबाजी स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में प्रतिद्वंद्वी को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत का राष्ट्रगान बजने के दौरान उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

कोच टेकराम बोले- गलतियों को दोबारा नहीं दोहराएंगे

कोच टेकराम ने कहा कि मुकाबले के दौरान सचिन से कुछ गलतियां हुईं, जिन पर आगे काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन गलतियों को दोहराया न जाए, इस पर विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने कहा, “सचिन सिवाच ने वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह स्वर्ण पदक जीता है। उसने साबित कर दिया कि यदि खिलाड़ी लक्ष्य तय कर निरंतर मेहनत करे तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता। मुझे अपने शिष्य पर गर्व है।” कोच ने उम्मीद जताई कि सचिन आने वाले ओलंपिक और विश्व प्रतियोगिताओं में भी भारत का तिरंगा बुलंद करेंगे।

सचिन की सफलता को पूरे गांव की जीत बताया

सचिन के करीबी अशोक सिवाच ने कहा कि सचिन ने गांव मिताथल, भिवानी और पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है। यह स्वर्ण पदक केवल सचिन की नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत है। उन्होंने कहा कि सचिन की सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच से हर सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने सचिन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह आगे भी भारत के लिए कई स्वर्ण पदक जीतें।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

सचिन के स्वागत कार्यक्रम में विधायक कपूर वाल्मीकि, समाजसेवी अशोक सिवाच, नरेश सरपंच प्रतिनिधि, पूर्व सरपंच जयबीर, वीरेंद्र किरोड़ी, महाबीर, पोलू, मास्टर अनिल कुमार, मास्टर पवन मिताथल, सुधीर पहलवान, छात्रनेता कमल प्रधान, अशोक मलिक, जगदीश एसपीओ, नरेंद्र एसडीओ, बलबीर बजाड़, रणबीर पालूवास, मंदीप सुई, प्रेम धनाना, अजीत सरपंच और मास्टर नीर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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