कुरुक्षेत्र। हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री और पिहोवा से चार बार विधायक रहे दिवंगत जसविंदर सिंह संधू के बेटे गगनजोत संधू (48) का शनिवार को उनके पैतृक गांव गुमथला गढ़ू में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शुक्रवार को पंजाब के रोपड़ जिले के पखराली गांव स्थित फार्म हाउस पर गगनजोत ने खुद को राइफल से गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। शनिवार को बड़े बेटे आफताब ने उन्हें मुखाग्नि दी, जबकि उनका छोटा बेटा स्पेन में पढ़ाई करने के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला घरेलू झगड़े से जुड़ा लग रहा है, हालांकि खुदकुशी के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है।
दिग्गजों ने दी अंतिम विदाई, गांव के गुरुद्वारे में हुई अरदास
गगनजोत संधू की अंतिम यात्रा में क्षेत्र की कई राजनीतिक हस्तियों और बड़ी संख्या में आम लोगों ने शिरकत की। अंतिम संस्कार में थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, शाहबाद विधायक रामकरण काला, पिहोवा विधायक मंजीत चट्ठा और नगर पालिका अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि मौजूद रहे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांव के गुरुद्वारे में अरदास की गई। इससे पहले शुक्रवार देर रात ही गगनजोत का पार्थिव शरीर रोपड़ से उनके पैतृक गांव लाया गया था।
पिता के निधन के बाद भाई से अलग बना लिया था घर
गगनजोत संधू अपने पीछे पत्नी सिमरनजीत कौर और दो बेटों को छोड़ गए हैं। उनका बड़ा बेटा आफताब चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहा है, वहीं छोटा बेटा जोरावर स्पेन में है। पूर्व मंत्री जसविंदर सिंह संधू की तीन संतानों में गगनजोत बड़े भाई जसतेज सिंह संधू से छोटे और हरकीरत संधू से बड़े थे। वर्ष 2019 में लीवर कैंसर से पिता के निधन के बाद गगनजोत पुश्तैनी घर छोड़कर भाई से अलग हो गए थे। उन्होंने पुश्तैनी मकान के पास ही अपना नया घर और फार्म हाउस बना लिया था, जहां वह परिवार के साथ रह रहे थे।
इनेलो से शुरुआत, कांग्रेस का दामन और सियासी उतार-चढ़ाव
गगनजोत संधू को पिता की राजनीतिक विरासत का मुख्य वारिस माना जाता था और उनके पिता भी चाहते थे कि वह राजनीति में आगे आएं। उन्होंने इनेलो से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन 2019 में पिता की मौत के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय नामांकन भरा था, जिसे बाद में दीपेंद्र हुड्डा के समझाने पर वापस ले लिया। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में गगनजोत और उनके बड़े भाई जसतेज संधू के एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं गर्म हुई थीं, हालांकि बाद में दोनों ही चुनाव लड़ने से पीछे हट गए थे।
गुमथला गढ़ू को बनाया था हरियाणा की पहली डिजिटल पंचायत
राजनीतिक उतार-चढ़ाव के इतर गगनजोत संधू की पहचान गांव में कराए गए विकास कार्यों के लिए भी रही। वह अपने पैतृक गांव गुमथला गढ़ू से दो बार सरपंच रहे थे। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने गांव में वाई-फाई और डिजिटल पंचायत की पहल की थी। वर्ष 2016 में उन्होंने गांव में वाई-फाई हॉटस्पॉट सुविधा शुरू कराई थी, जिसके बाद गुमथला गढ़ू हरियाणा की पहली हाईटेक पंचायत बनी थी।
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