रायपुर। राजधानी के कोटा रोड स्थित क्रेस्ट ग्रीन्स रेसिडेंशियल सोसायटी में काम के दौरान करंट से माली एस. तुफान की मौत मामले में एक बार फिर नया मोड़ आया है। पुलिस ने सोसायटी के तात्कालिक मैनेजर शिवम कुमार के खिलाफ सरस्वती नगर थाने में एफआईआर दर्ज किया है। वहीं क्रेस्ट ग्रीन्स सोसाइटी के तात्कालिक मैनेजर शिवम कुमार ने पुलिस की एफआईआर और पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया है। तात्कालिक मैनेजर शिवम ने आरोप लगाया है कि इस केस में सोसायटी के पदाधिकारियों को बचाने मुझे जबरन फंसाया गया है।

बता दें कि घटना के करीब पांच माह बाद मृतक की पत्नी ने सोसायटी प्रबंधन के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नरेट अफसरों से मामले की शिकायत की थी और सोसायटी पदाधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। पीड़ित महिला ने अपनी लिखित शिकायत में बताया था कि सोसायटी परिसर में खुले और असुरक्षित हाईटेंशन बिजली तारों की वजह से उनके पति की मौत हुई, जो सीधे तौर पर प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम है। इस मामले में पुलिस ने क्रेस्ट ग्रीन्स सोसायटी के मैनेजर शिवम कुमार के खिलाफ FIR दर्ज किया है।

पदाधिकारियों के दबाव में आकर मजदूरों को बुलाया : तात्कालिक मैनेजर

वहीं तात्कालिक मैनेजर शिवम कुमार ने सोसायटी के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मजदूरों की मौत के मामले में मुझे जबरन फंसाया जा रहा है, ताकि सोसायटी के अध्यक्ष विनय अग्रवाल, उपाध्यक्ष शंकर बजाज, योगेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, अनिल अग्रवाल और महेंद्र तलरेजा सहित अन्य पदाधिकारियों को बचाया जा सके। तात्कालिक मैनेजर ने बताया, उक्त घटना के दिन भी मैं मजदूरों को बुलाने से इंकार किया था, लेकिन सोसायटी पदाधिकारियों के दबाव में आकर मुख्य मजदूरों को बुलाया गया। पूरी घटना के वक्त मैं मजदूरों की जान बचाने में जुटा हुआ था। एक-एक मजदूर को तत्काल अस्पताल लेकर जाने की व्यवस्था की, लेकिन अन्य पदाधिकारी खुद को बचाने और पूरे मामले को रफादफा करने में जुटे हुए थे। इस घटना के बाद मैं बेहद ही मानसिक तनाव से गुजर रहा हूं। इस मामले को लेकर जब भी सोसाइटी के पदाधिकारी से मैंने बात करनी चाही, वे सिर्फ अपना पल्ला झाड़ते नजर आए।

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पढ़िए पूरी खबर

जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता एस. गायत्री ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि उनके पति एस. तुफान की मृत्यु क्रेस्ट ग्रीन्स सोसाइटी में काम करते हुए प्रबंधन की घोर लापारवाही का शिकार होने से हुई है। बीते 1 दिसंबर 2025 को क्रेस्ट ग्रीन्स फेज-1 परिसर में बागवानी का कार्य कर रहे थे। सुबह करीब 9.30 बजे वे धातु की सीढ़ी लेकर जा रहे थे। इसी दौरान सीढ़ी का संपर्क परिसर में खुले पड़े वोल्टेज बिजली तार से हो गया। तेज करंट की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से झुलस गए। मेरे पति का शरीर करंट लगने से करीबन 60-65 प्रतिशत तक जल गया था। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए पचपेड़ी नाका स्थित निजी बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने विद्युत दाह को गंभीर बताते हुए उपचार किया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

मुआवजे का भरोसा देकर शिकायत से रोका

मृतक की पत्नी ने अपनी लिखित शिकायत में बताया था कि हादसे के बाद सोसायटी के पदाधिकारियों ने परिवार पर लगातार दबाव बनाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से रोका। सोसायटी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया था कि उन्हें 20 लाख रुपए का मुआवजा, आर्थिक सहायता और भविष्य नौकरी में सहयोग दिया जाएगा। आर्थिक संकट की स्थिति में उन्होंने इन आश्वासनों पर भरोसा किया, जिसके कारण तत्काल पुलिस शिकायत नहीं की गई, लेकिन घटना के कई महीनों बीत जाने के बाद भी सोसायटी पदाधिकारी सिर्फ गुमराह कर रहे हैं। परिवार के सदस्यों से सीधे संपर्क तोड़कर पदाधिकारी पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। परिवार अब एकजुट होकर मेरे पति के मौत के जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई चाहता है।

परिवार पर टूटा आर्थिक संकट

मृतक की पत्नी ने बताया कि एस. तुफान परिवार के एकमात्र कमाने वाला मुखिया था। उनकी मौत के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। परिवार में पत्नी, पुत्र, अविवाहित बहन और करीबन 90 वर्ष की वृद्ध माता आश्रित हैं। परिवार का कहना है कि आजीविका का मुख्य स्रोत खत्म हो जाने से उनके सामने रोजमर्रा के खर्चों का संकट खड़ा हो गया है, जिसके कारण जीवन गुजारने में बहुत कठनाई का सामना करना पड़ रहा है।

पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

शिकायत में क्रेस्ट ग्रीन्स सोसायटी के अध्यक्ष विनय अग्रवाल, उपाध्यक्ष शंकर बजाज, योगेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, अनिल अग्रवाल और महेंद्र तलरेजा सहित अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर निष्पक्ष जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है। परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि न्याय पाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराना है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से किसी अन्य व्यक्ति की जान न जाए।

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