रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने जो तूफान मचाया था, उसका दूसरा अध्याय अब रायबरेली के गेगासों गंगा घाट से लिखा जा रहा है. संकटा देवी के मंदिर में दान और घंटों की चोरी को लेकर गंभीर विवाद उभरा है, जिसने भक्तों की आस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीण ने मंदिर के ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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ठेकेदार ने मंदिर परिसर का एक वर्ष का ठेका लिया है, जिसमें केवल लड्डू, पूरी, चुनरी और चढ़ावे का ही दाखिला है. आभूषण और धातुओं का ठेका उसके पास नहीं है. बावजूद इसके, भक्तों के चढ़ावे की रकम व्यक्तिगत फोन-पे नंबर और यूको बैंक के निजी खाते में मंगाई जा रही है. मंदिर से करीब 60-70 लाख रुपये मूल्य के घंटे गायब हैं. वे घंटे जो गंगा तट पर घंटों आस्था जगाते थे, आज खामोश हैं.
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अयोध्या में सोने-चांदी, चरण पादुका और चढ़ावे की हेरफेरी जिस तरीके से होई, उसी पैटर्न की कहानी गंगा के किनारे दोहराई जा रही है. देखा जा रहा है कि राम नगरी से शुरू हुई ‘भक्ति व्यापार’ की बीमारी अब गंगा तट की पवित्र भूमि तक फैल चुकी है. विरोध में ग्रामीण एसपी कार्यालय पहुंचा और ठेकेदार के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की. सवाल यह है कि जब भगवन के मंदिर में भगवन का माल बिकने लगे, तो भक्त किस दरवाजे पर माथा टेके?


