गया। जिले के शेरघाटी प्रखंड अंतर्गत जोगापुर गांव में सोमवार की शाम उस वक्त मातम पसर गया, जब आकाशीय बिजली की चपेट में आने से तीन किशोरों की दर्दनाक मौत हो गई। जोगापुर के मांझी टोले के रहने वाले ये बच्चे घर से महज 200 मीटर की दूरी पर आम के टिकोले चुन रहे थे, तभी काल बनकर गिरी बिजली ने उनकी जान ले ली।

​चश्मदीद की जुबानी: आंखों के सामने दम तोड़ दिया

​हादसे के वक्त चारों दोस्त संदीप, गौतम, दिलकश और शुभम बगीचे में थे। उत्तरजीवी शुभम ने बताया कि आंधी शुरू होते ही उसने दोस्तों को घर भागने के लिए कहा था। शुभम आगे-आगे दौड़ रहा था और बाकी तीनों उसके पीछे थे। घर पहुंचने ही वाले थे कि अचानक तेज रोशनी के साथ बिजली गिरी। शुभम ने पीछे मुड़कर देखा तो उसके तीनों दोस्त बेसुध खेत में पड़े थे। शुभम के चीखने-चिल्लाने पर जब ग्रामीण पहुंचे, तब तक तीनों की सांसें थम चुकी थीं और उनके शरीर बुरी तरह झुलस चुके थे।

​परिवारों का बैकग्राउंड: किसी का सहारा छिना, किसी का सपना टूटा

  • ​संदीप मांझी (15 वर्ष): संदीप की कहानी सबसे मार्मिक है। दो साल पहले पिता की हत्या और एक साल पहले मां की बीमारी से मौत के बाद वह अनाथ हो गया था। बूढ़े दादा रामदास मांझी ही उसके एकमात्र सहारे थे। दादा का रोते हुए कहना था, “बेटे-बहू पहले गए, अब पोता भी छोड़ गया।”
  • ​गौतम मांझी: गौतम के पिता बाहर मजदूरी करते हैं। मां रंजू कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें मलाल है कि काश उन्होंने गौतम को घर से बाहर जाने ही न दिया होता।
  • ​दिलकश मांझी: छठी कक्षा में पढ़ने वाला दिलकश बड़ा होकर कुछ बनने का सपना देखता था। उसके पिता सुरेंद्र मांझी ने बताया कि वह उस दिन बिना खाना खाए ही खेलने निकल गया था।

​प्रशासन से नाराजगी और मुआवजे की मांग

​हादसे के बाद पूरे मांझी टोले में मातम छाया हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए तो तत्काल सहायता मिली, लेकिन आपदा विभाग का मुख्य मुआवजा अब तक नहीं पहुंचा है। पीड़ित परिवार अत्यंत गरीब पृष्ठभूमि से हैं, इसलिए ग्रामीण जल्द से जल्द सरकारी मदद की गुहार लगा रहे हैं।

​गुरारू में भी बिजली का तांडव

इसी दौरान गुरारू प्रखंड के धानु बीघा गांव में भी 35 वर्षीय श्रीकांत यादव की बिजली गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह लकड़ी लेने या ताड़ी पीकर लौट रहे थे, तभी वे इस प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गए।