गोरखपुर.गोरखपुर शहर में एक क्लास-4 के छात्र के व्यवहार में मोबाइल और अश्लील ऑनलाइन कंटेंट के बढ़ते असर का मामला सामने आया है. परिवार के मुताबिक, ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चे को मोबाइल मिला था, जिसके बाद धीरे-धीरे उसमें मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत बढ़ती गई. मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने परिजनों को मनोवैज्ञानिक से सलाह लेने को कहा. फिलहाल बच्चे की काउंसलिंग चल रही है.

इसे भी पढ़ें- लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश को मिलते ही राजभर का तंज, बोले- शिवपाल पर भरोसा, अखिलेश पर नहीं

बाथरूम में घंटों मोबाइल चलाता था

परिजनों के अनुसार, बच्चा करीब छह महीने से मोबाइल के लिए जिद करने लगा था. वह मोबाइल लेकर बाथरूम में काफी देर तक रहता और रोकने पर चिड़चिड़ा हो जाता था. बाद में परिवार को उसके फोन में उम्र के लिए अनुपयुक्त अश्लील सामग्री मिली. परिजनों ने बच्चे को इसके नुकसान के बारे में समझाया और विशेषज्ञ से मदद लेने का फैसला किया.

स्कूल में भी सामने आया व्यवहार

करीब दो महीने पहले स्कूल की ओर से परिजनों को बुलाया गया. प्रिंसिपल ने बच्चे के व्यवहार को लेकर चिंता जताई. स्कूल में शिक्षक और सहपाठियों के प्रति अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आई थीं. इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे का नाम काट दिया और परिवार को विशेषज्ञ से इलाज और काउंसलिंग कराने की सलाह दी.

मनोवैज्ञानिक की निगरानी में इलाज

मामले में बच्चे की काउंसलिंग कर रहीं मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय के मुताबिक, बच्चे को नियमित काउंसलिंग की जरूरत है. परिवार के अनुसार, विशेषज्ञ ने बच्चे में बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की बात बताई है. हालांकि, किसी भी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन विशेषज्ञ की विस्तृत जांच के बाद ही किया जा सकता है. फिलहाल शाहपुर क्षेत्र में बच्चे की काउंसलिंग जारी है.

इसे भी पढ़ें- सपा में जाएंगे संजय निषाद? माता प्रसाद पांडे से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल

विशेषज्ञ ने ऑनलाइन कंटेंट से सावधान किया

मनोवैज्ञानिक ने बताया कि बच्चों में उम्र के अनुरूप व्यवहार से हटकर बदलाव दिखने पर माता-पिता को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. मोबाइल और इंटरनेट की निगरानी, सुरक्षित डिजिटल वातावरण और समय पर काउंसलिंग जरूरी है. विशेषज्ञ के मुताबिक, बच्चों को बिना निगरानी इंटरनेट की पहुंच देना उनके व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है.