गौरव जैन,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के आदिवासी बाहुल्य तरईगांव में शासकीय, जंगल मद और चरनोई भूमि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने करीब 229 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कराने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने कुछ राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है।

शिकायत करने पहुंचे लोगों में भाजपा किसान नेता बृजलाल राठौर, ग्राम पंचायत तरईगांव के सरपंच राहुल कुमार भैना, जिला पंचायत सदस्य पवन पैकरा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की शासकीय भूमि को निजी स्वामित्व में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और असंतोष का माहौल है।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार ग्राम तरईगांव के खसरा नंबर 943/1, 956, 982/1 और 983 की भूमि, जिनका रकबा क्रमशः 76.70 एकड़, 64.38 एकड़, 66.49 एकड़ और 21.40 एकड़ है, वर्षों से जंगल, चरनोई और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में इस्तेमाल होती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इन जमीनों पर बिना वैधानिक प्रक्रिया के निजी दावा प्रस्तुत कर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि राजस्व अधिकारियों द्वारा वर्ष 1954 के अधिकार अभिलेख के आधार पर भूमि की नपती और सीमांकन की प्रक्रिया की जा रही है। उनका कहना है कि इस दौरान निजी भूमि, शासकीय भूमि और जंगल मद की भूमि को एक साथ नापा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एक स्थानीय भूमाफिया को फायदा पहुंचाने और शासकीय भूमि पर कब्जा दिलाने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत पिछले लगभग एक वर्ष से भूमि सीमांकन की मांग कर रही है, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक देरी का लाभ उठाकर शासकीय भूमि पर दावा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
मामले को लेकर गांव में पिछले एक सप्ताह से आंदोलन जारी है। महिला, पुरुष और बच्चे भीषण गर्मी तथा तेज धूप के बीच लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन, जंगल और चरनोई भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी क्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से मुलाकात कर भूमाफिया तथा कथित रूप से संलिप्त राजस्व अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने भूमि का तत्काल सीमांकन, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार कलेक्टर ने उनकी बात सुनते हुए मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। तरईगांव का यह भूमि विवाद अब केवल सीमांकन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासकीय संपत्ति की सुरक्षा, ग्रामीणों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। ऐसे में अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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