Gudi Padwa 2025: आज, 30 मार्च, महाराष्ट्रीयन समाज गुड़ी पड़वा का पर्व मना रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह उत्सव चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है, जो पारंपरिक रूप से नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. घरों में गुड़ी स्थापित की जाती है, जिसमें बांस की डंडी पर रेशमी कपड़ा, नीम के पत्ते, फूल, गुड़-गाठी और एक कलश लगाया जाता है.
इस दिन विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं, जिनमें पूरनपोली, श्रीखंड और नीम-गुड़ का मिश्रण प्रमुख हैं. घरों की साफ-सफाई, रंगोली सजाने और मंदिरों में पूजा-अर्चना की परंपरा होती है.
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गुड़ी पड़वा की परंपराएँ और पूरनपोली का महत्व (Gudi Padwa 2025)
- समृद्धि और मिठास का प्रतीक – पूरनपोली एक मीठा व्यंजन है, जिसे आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि और मिठास का प्रतीक माना जाता है.
- संपन्नता और खुशहाली – चना दाल, गुड़ और घी से बनी पूरनपोली ऊर्जा और पोषण प्रदान करती है, जो नए साल की अच्छी शुरुआत का संकेत देती है.
- पौराणिक मान्यता – मान्यता है कि भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने मीठे व्यंजन बनाए थे, और यह परंपरा गुड़ी पड़वा के रूप में आज भी कायम है.
- ऋतु परिवर्तन और पोषण – यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है. पूरनपोली में मौजूद चना दाल और गुड़ शरीर को मौसम परिवर्तन के अनुकूल ढालने में सहायक होते हैं.
- पारिवारिक जुड़ाव – पूरनपोली बनाना एक पारिवारिक परंपरा है, जिसमें पूरा परिवार मिलकर व्यंजन तैयार करता है, जिससे आपसी प्रेम और सामूहिकता बढ़ती है.

