Dharm Desk – साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं. जिनमें चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि शामिल हैं. माघ और आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि को देवी आदिशक्ति की आराधना, साधना और आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है. इस दौरान देवी के गुप्त स्वरूपों की उपासना के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. इस समय आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 23 जुलाई को समाप्त होगी.

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का भी विशेष महत्व है. इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुरसुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की आराधना की जाती है. साधक इन दिनों में विशेष मंत्र जाप, ध्यान और पूजा-अर्चना करते है.

कौन सी वस्तु दान करना चाहिए

गुप्त नवरात्रि में जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान देना शुभ होता है. अन्न, वस्त्र, फल, घी, गुड़, नारियल, लाल चुनरी और धार्मिक पुस्तकों का दान करने की परंपरा रही है. इसके साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी इस अवधि का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. श्रद्धा और सेवा भाव से किया गया, दान सामाजिक सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है. गुप्त नवरात्रि में खाद्य सामग्री का दान प्रमुख है. जरूरतमंदों को भोजन कराने के अलावा गेहूं और चावल का दान भी किया जाता है. तिल और गुड़ का दान जीवन की बाधाओं को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए किया जाता है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता और सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी इस अवधि में किया जाता है. विवाहित महिलाओं को चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी और कंघी जैसी सुहाग सामग्री देना सही होता है. वहीं मंदिरों में दीप प्रज्वलित करना और प्रकाश अर्पित करना भी देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. संयम, सेवा और श्रद्धा के साथ की गई उपासना को गुप्त नवरात्रि का मूल आधार माना जाता है. अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में इन मान्यताओं एवं विधियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है .

  1. साधना और पूजा को गोपनीय रखना.
  2. सात्विक भोजन करना.
  3. ब्रह्मचर्य का पालन करना.
  4. मांसाहार, मदिरा और अन्य तामसिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखना.