Dharm Desk- हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है. आज 14 मई को गुरु प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. जिसे भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का बेहद शुभ कहा जाता है. आज विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख, शांति, धन और ज्ञान की प्राप्ति होती है.

प्रदोष काल और अभिषेक का समय

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई को दोपहर 11. 21 मिनट पर हो चुकी है और इसका समापन 15 मई को सुबह 8.32 मिनट पर होगा. उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए आज ही व्रत रखा जा रहा है. इस दिन प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है, जो शाम 7.04 मिनट से रात 9.09 मिनट तक रहेगा। यही समय भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम काल रहने वाला है.

भोलेनाथ का अभिषेक करने की विधि

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा, अभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. इस दौरान शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, दीप और चावल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है.

पूजा के दौरान इन मेट्रो का करें जाप

पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय जैसे मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है. इसके साथ ही शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया, क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो…इस प्रदोष स्तुति का पाठ करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है.

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से होता है. ऐसे में गुरु प्रदोष व्रत रखने से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है. व्यक्ति को ज्ञान, सम्मान, विवाह और संतान सुख की प्राप्ति होती है. यह व्रत विशेष रूप से आर्थिक संकट, वैवाहिक जीवन की समस्याओं और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है.