गुरुग्राम में सेक्टर-35 से हरसरू के बीच बिछी 66 केवी हाईटेंशन लाइन का कंडक्टर होलो पाइप के भीतर टूटने से अचानक हाईवे पर गिर गया। हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम की टीमों ने रातभर चले अभियान के बाद तड़के तीन बजे लाइन दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति बहाल की।

गुरुग्राम। सेक्टर-35 से हरसरू मार्ग पर गुजर रही 66 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन का कंडक्टर अचानक टूटकर सीधे हाईवे पर आ गिरा। इस घटना की प्रारंभिक पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि तार जोड़ने वाले होलो पाइप के भीतर से कंडक्टर टूट चुका था, जबकि बाहरी सतह से यह पूरी तरह सामान्य नजर आ रहा था। संयोगवश जिस वक्त तार गिरा, उस दौरान कोई बड़ा हादसा घटित नहीं हुआ।

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे बिजली तारों के सिरों को आपस में जोड़ने के लिए विशेष होलो पाइप का उपयोग कर जाइंट तैयार किया जाता है। इस मामले में इसी पाइप के आंतरिक हिस्से में खराबी आने के कारण जाइंट विफल हो गया और पूरा तार नीचे गिर पड़ा। बाह्य रूप से पाइप में कोई खराबी न दिखने की वजह से विभागीय कर्मचारी समय रहते इस अंदरूनी टूट-फूट को भांप नहीं सके।

रातभर चला मरम्मत अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPN) के तकनीकी दस्ते तुरंत मौके पर पहुंचे। पूरी रात चले मरम्मत अभियान के बाद रविवार तड़के करीब तीन बजे प्रभावित और क्षतिग्रस्त तार को बदलकर नया कंडक्टर लगाया गया, जिसके पश्चात 66 केवी लाइन के जरिए विद्युत आपूर्ति पुनः सुचारू कर दी गई।

इस दौरान टीएस मानेसर और टीएस गुरुग्राम डिविजन से जुड़े तमाम प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी भोर तीन बजे तक घटनास्थल पर ही तैनात रहे।

जवाबदेही और जांच की प्रक्रिया

विभागीय स्तर पर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि नियमित गश्त के बावजूद होलो पाइप के अंदरूनी क्षरण अथवा खराबी का आकलन क्यों नहीं किया जा सका। संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) और कार्यकारी अभियंता (XEN) द्वारा अनुरक्षण रिपोर्टों के नियमित पुनरीक्षण की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।

रविवार को शासकीय अवकाश होने के कारण औपचारिक बैठक नहीं हो सकी, हालांकि सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की जाएगी। इस विषय पर एसडीओ विकास यादव ने पक्ष रखते हुए कहा कि विभागीय गाइडलाइन के तहत दिन में फॉलोअप तथा रात्रि के समय लाइनों की सघन पेट्रोलिंग की जाती है। चूंकि कंडक्टर का टूटा हुआ हिस्सा बाहरी रूप से बिल्कुल सही अवस्था में दिखाई दे रहा था, इसलिए आंतरिक खराबी का समय पर पता नहीं चल सका।