कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में पढ़ाई और शोध के लिए आए विदेशी विद्यार्थियों के अनुभव अब प्रदेश की पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का जरिया बनेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को संत कबीर कुटीर में 14 देशों के विद्यार्थियों से मुलाकात कर उनके अध्ययन, शोध और हरियाणा में रहने के अनुभव जाने। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये विद्यार्थी अपने देशों में लौटकर हरियाणा की शिक्षा, संस्कृति और यहां मिले अनुभवों की सकारात्मक तस्वीर पेश कर सकते हैं।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से केवल औपचारिक बातचीत नहीं की, बल्कि उनके शोध विषयों और यहां हासिल की गई नई सीख के बारे में सीधे सवाल किए। विद्यार्थियों ने भी हरियाणा के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल, शोध सुविधाओं, संस्कृति और लोगों के व्यवहार से जुड़े अनुभव मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

‘डिग्री लेकर मत जाइए, हरियाणा की यादें भी साथ ले जाइए’

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय का समय केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होता। शिक्षा के साथ मिलने वाले अनुभव और संस्कार लंबे समय तक व्यक्ति के साथ रहते हैं। उन्होंने विदेशी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि हरियाणा से मिली शिक्षा और अनुभवों का इस्तेमाल वे अपने-अपने देशों के विकास में भी करें।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार दुनिया के साथ केवल ‘G2G’ यानी Government to Government (सरकार से सरकार) संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ‘Heart to Heart’ यानी दिल से दिल का जुड़ाव भी मजबूत करना चाहती है। विदेशी विद्यार्थियों के जरिए People to People Connect (लोगों के बीच संपर्क) बढ़ेगा और अलग-अलग देशों के बीच आपसी समझ व विश्वास मजबूत होगा।

अफगान छात्रा ने हिंदी में सुनाए सात साल के अनुभव

कार्यक्रम में अफ्रीकी देशों सहित कई देशों के विद्यार्थी शामिल हुए। इनमें अफगानिस्तान की एक छात्रा भी रही, जिसने हरियाणा के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में पीएचडी पूरी की है। उसने प्रदेश में बिताए अपने सात साल के अनुभव मुख्यमंत्री के सामने साझा किए। खास बात यह रही कि छात्रा ने पूरा संवाद हिंदी में किया।

अन्य विदेशी विद्यार्थियों ने भी बताया कि हरियाणा में पढ़ाई और शोध के साथ उन्हें भारतीय तथा हरियाणवी संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिला।

हरियाणा के छात्रों के लिए यूके जाने का नया रास्ता

कार्यक्रम में विदेश सहयोग विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार ने बताया कि हरियाणा के विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा और शोध के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम चल रहा है। जल्द ही प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए यूके की यूनिवर्सिटी में अध्ययन का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।

इस पहल से विद्यार्थियों को विदेशी विश्वविद्यालयों में नई तकनीक, आधुनिक विषयों और बेहतर अध्ययन पद्धतियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। विभाग के अनुसार इससे भविष्य में रोजगार और अंतरराष्ट्रीय करियर के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों को विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग और एमओयू (समझौता ज्ञापन) बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही विदेशी शिक्षा के लिए जरूरी वीजा प्रक्रिया को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए।

कुरुक्षेत्र से ‘गो ग्लोबल’ संदेश

नायब सैनी ने युवाओं को बदलती दुनिया के अनुरूप तैयार रहने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक शिक्षा, चिकित्सा और कृषि समेत अनेक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। ऐसे में युवाओं को लगातार सीखने और तकनीकी बदलावों के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश है। कुरुक्षेत्र की धरती से भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया था। युवाओं को मेहनत, निष्ठा और निरंतर सीखने की भावना के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।

विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन चौधरी ने कहा कि हरियाणा में पढ़ रहे 14 देशों के विद्यार्थी प्रदेश के अनौपचारिक दूत की भूमिका निभा सकते हैं। उनके माध्यम से हरियाणा की शिक्षा, संस्कृति, कृषि और शोध की जानकारी दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ने से प्रदेश के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और रोजगार के अंतरराष्ट्रीय अवसर भी बढ़ेंगे।

कार्यक्रम में विदेश सहयोग विभाग के महानिदेशक अशोक मीणा, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव अजय कुमार, एचएयू के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज सहित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के अधिकारी, शिक्षक एवं विदेशी विद्यार्थी मौजूद रहे।

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